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टैरिफ पर ट्रम्प का मूड फिर 'स्विंग', 15 फीसदी का ऐलान; भारत पर क्या असर

ये टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेंगे। इसे आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की मंजूरी अनिवार्य होगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रम्प ने टैरिफ 15 फीसदी किया / Reuters/File Photo

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा दांव चलते हुए सभी देशों से होने वाले आयात पर अस्थायी टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का निर्णय लिया है। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पुराने टैरिफ प्रोग्राम को असंवैधानिक घोषित करने के महज 24 घंटे के भीतर आया है। इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?

20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति आर्थिक आपातकालीन कानून (IEEPA) का उपयोग करके व्यापक टैरिफ नहीं लगा सकते। इसके तुरंत बाद ट्रम्प ने सेक्शन 122 (Trade Act of 1974) का सहारा लिया।

यह भी पढ़ें- व्हाइट हाउस ने किया साफ- भारत पर टैरिफ अस्थायी रूप से घटकर 10% हो जाएगा

सेक्शन 122 क्या है? और शर्तें 
यह कानून राष्ट्रपति को 'भुगतान संतुलन' (Balance of Payments) की समस्या से निपटने के लिए अधिकतम 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। ये टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेंगे। इसे आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की मंजूरी अनिवार्य होगी।

भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह स्थिति "राहत और चुनौती" दोनों लेकर आई है। इससे पहले भारत पर 'रेसिप्रोकल टैरिफ' के तहत लगभग 18% से 25% तक की ड्यूटी लग रही थी। अब वैश्विक स्तर पर 15% की सीमा तय होने से भारतीय निर्यातकों के लिए प्रभावी टैक्स की दर पहले की तुलना में कम हो सकती है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ हुआ व्यापार समझौता बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा, "भारत के साथ डील जारी है, कुछ भी नहीं बदला है। वे टैरिफ चुकाएंगे और हम नहीं।"

निर्यात क्षेत्रों को लाभ
रत्न-आभूषण (Gems & Jewellery), कपड़ा (Textiles) और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को 15% की इस निश्चित सीमा से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में थोड़ी बढ़त मिल सकती है, क्योंकि पहले उन पर इससे कहीं अधिक शुल्क का खतरा मंडरा रहा था। व्हाइट हाउस के अनुसार, क्रिटिकल मिनरल्स, फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयाँ), और ऊर्जा उत्पादों को इन नए टैरिफ से बाहर रखा गया है, जो भारत के दवा उद्योग के लिए बड़ी राहत है।

आगे की अनिश्चितता
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्शन 122 का इस्तेमाल भी कानूनी चुनौतियों में फंस सकता है क्योंकि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले कभी इसका इस तरह उपयोग नहीं किया है। साथ ही, 150 दिनों के बाद रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस इसे आगे बढ़ाएगी या नहीं, इस पर भी संदेह है, क्योंकि अमेरिका में बढ़ती महंगाई का दोष इन टैरिफ पर मढ़ा जा रहा है।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "मैंने दुनिया भर के देशों पर टैरिफ को कानूनन अनुमत अधिकतम 15% के स्तर तक बढ़ा दिया है। कई देश दशकों से अमेरिका को लूट रहे थे, अब उनके लिए जवाबदेही का समय है।"

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