किताब का कवर / Handout
भारतीय मूल की कैनेडियन-अमेरिकी लेखिका साबित्री परसाद 8 सितंबर को अपनी बच्चों की सचित्र किताब 'द जर्नी सीड' (The Journey Seed) रिलीज करेंगी। यह किताब युवा पाठकों को 1838 और 1917 के बीच भारतीय अनुबंध-आधारित प्रवासन (indentured migration) के इतिहास से प्रेरित कहानी कहती है। नई दिल्ली की रहने वाली चंद्रिमा चटर्जी द्वारा सचित्र यह किताब, परसाद की अपनी इंडो-कैरिबियन विरासत पर आधारित है और भारत से एक परिवार की यात्रा को दिखाती है।
'इटर्नल ट्री बुक्स' द्वारा प्रकाशित और 'साइमन एंड शूस्टर' द्वारा वितरित, यह 36 पन्नों की हार्डकवर किताब 6 से 9 साल के बच्चों के लिए है। कहानी माला नाम की एक छोटी लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका परिवार भारत में अपना गांव छोड़कर समुद्र पार एक अनजान देश की यात्रा करता है। अपनी परंपराओं और आम की एक गुठली को साथ लेकर, यह परिवार यादों, पहचान और एक-दूसरे का साथ बनाए रखते हुए बदलावों का सामना करता है।
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प्रकाशक के अनुसार, 1838 और 1917 के बीच 15 लाख से ज्यादा भारतीय अनुबंध-आधारित मजदूरों के तौर पर समुद्र पार गए थे, फिर भी कैरिबियन और उसके बाहर लाखों परिवारों के जीवन को आकार देने वाले इस इतिहास का बच्चों के साहित्य में शायद ही कभी जिक्र हुआ है। प्रकाशक का कहना है कि यह किताब एक बच्चे के नजरिए से इस विषय को पेश करती है और इसमें शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक जानकारी और क्लासरूम रिसोर्स भी शामिल हैं।
परसाद ने कहा कि उन्होंने 'द जर्नी सीड' इसलिए लिखी ताकि "त्रिनिदाद में भारतीय अनुबंध-आधारित प्रवासन के कम ज्ञात इतिहास और पीढ़ियों से चले आ रहे अपनेपन की तलाश" को साझा किया जा सके। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में डिग्री रखने वाली लेखिका ने पहले भी बच्चों के लिए कई किताबें लिखी हैं, जिनमें 'गारबोलॉजी किड्स' (Garbology Kids) सीरीज और 'व्हाट इज कोरोनावायरस?' (What Is Coronavirus?) शामिल हैं। वह ऑरलैंडो में रहती हैं।
किताब की चित्रकार (इलस्ट्रेटर) चटर्जी, नई दिल्ली में रहने वाली एक पुरस्कार विजेता कलाकार हैं। फुल-टाइम इलस्ट्रेटर बनने से पहले, उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस जैसे पब्लिशिंग हाउस के साथ कमीशनिंग एडिटर के तौर पर काम किया था।
प्रकाशक ने कहा कि इस किताब का मकसद बच्चों के साहित्य में बड़े प्रवासन इतिहास से जुड़ी कमी को पूरा करना है। उनका कहना है कि जहां यूरोपीय आप्रवासन, एलिस आइलैंड और अंडरग्राउंड रेलरोड के बारे में किताबें आसानी से उपलब्ध हैं, वहीं प्रवासन की अन्य कहानियां स्कूल की किताबों की अलमारियों से काफी हद तक गायब हैं।
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