अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ पीएम मोदी / ANS/X/@narendramodi
भारत-अमेरिका संबंधों की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए अमेरिकी सांसदों ने स्टेट डिपार्टमेंट से भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को कांग्रेस के सामने पेश करने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रिश्ते पर बेहतर निगरानी और पारदर्शिता जरूरी है।
11 फरवरी (स्थानीय समय) को दक्षिण और मध्य एशिया पर आयोजित हाउस सबकमेटी की सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक रैंकिंग मेंबर सिडनी कमलेगर-डोव ने दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर से पूछा कि क्या वे राजदूत गोर को समिति के सामने पेश होने के लिए सहयोग करेंगे। कमलेगर-डोव ने कहा, “यह क्षेत्र बेहद रणनीतिक, महत्वपूर्ण और शक्तिशाली है। ऐसे में राजदूत का समिति के सामने आकर सवालों का जवाब देना जरूरी है।”
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राजदूत का बचाव, लेकिन स्पष्ट आश्वासन नहीं
पॉल कपूर ने राजदूत गोर के कामकाज का बचाव करते हुए उन्हें “बेहद प्रभावी राजदूत” बताया। उन्होंने कहा कि गोर ने कम समय में कई सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं और वे राष्ट्रपति के करीबी विश्वासपात्र हैं। कपूर ने कहा, “उन्हें राष्ट्रपति का पूरा भरोसा और विश्वास हासिल है। हम दोनों मिलकर काम कर रहे हैं।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया कि गोर समिति के सामने पेश होंगे। उन्होंने केवल इतना कहा कि वे इस संभावना पर चर्चा करेंगे।
हिंद-प्रशांत में भारत की अहम भूमिका
सुनवाई के दौरान कपूर ने भारत को “हिंद-प्रशांत के पश्चिमी हिस्से का आधार स्तंभ” बताया। सांसदों ने हालिया अमेरिका-भारत व्यापार ढांचे और बढ़ते रक्षा सहयोग का भी उल्लेख किया। सांसदों का मानना है कि चीन को संतुलित करने, हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में राजदूत से सीधे संवाद से अमेरिका की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और रणनीति की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
रिश्तों का बढ़ता दायरा
पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका संबंध रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुए हैं। वॉशिंगटन, नई दिल्ली को हिंद-प्रशांत रणनीति में एक प्रमुख साझेदार के रूप में देखता है। ऐसे में कांग्रेस की यह मांग दर्शाती है कि अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति और भारत के साथ बढ़ते संबंधों पर विधायकों की नजर बनी हुई है। सुनवाई बिना किसी ठोस समयसीमा के समाप्त हुई, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस भारत-अमेरिका रिश्तों की दिशा और क्रियान्वयन पर सक्रिय भूमिका निभाना चाहती है।
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