प्रतीकात्मक तस्वीर / Pexels
अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के 100 सांसदों के द्विदलीय समूह ने होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम से हेल्थकेयर सेक्टर को H-1B वीजा पर लगाए गए नए 1 लाख डॉलर शुल्क से छूट देने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि यह शुल्क स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले से मौजूद स्टाफ की कमी को और गहरा कर सकता है तथा मरीजों की देखभाल पर असर डाल सकता है।
11 फरवरी को लिखे गए पत्र में सांसदों ने 19 सितंबर को जारी राष्ट्रपति घोषणा “Restriction on Entry of Certain Nonimmigrant Workers” को लेकर गहरी चिंता जताई। इस घोषणा के तहत नए H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ताओं पर 100000 डॉलर की फीस लगाई गई है। हालांकि, इसमें यह प्रावधान भी है कि यदि राष्ट्रीय हित में हो और सुरक्षा को खतरा न हो तो होमलैंड सिक्योरिटी सचिव किसी सेक्टर को छूट दे सकते हैं।
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सांसदों ने पत्र में लिखा, “हम आपसे आग्रह करते हैं कि हेल्थकेयर सेक्टर को इस शुल्क से छूट दी जाए, ताकि स्वास्थ्य कार्यबल पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।”
पहले से गंभीर है स्टाफ की कमी
पत्र में संघीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि करीब 8.7 करोड़ अमेरिकी ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां पर्याप्त चिकित्सा पेशेवर उपलब्ध नहीं हैं। हेल्थ रिसोर्सेज एंड सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन (HRSA) के अनुसार अगले दशक में चिकित्सकों की मांग आपूर्ति से 86,000 तक अधिक हो सकती है।
इसके अलावा, क्लिनिकल लैबोरेटरी साइंस प्रोग्राम आवश्यक पेशेवरों की संख्या के आधे से भी कम छात्रों को प्रशिक्षित कर पा रहे हैं। सांसदों का कहना है कि इन कमियों को केवल घरेलू कार्यबल से पूरा नहीं किया जा सकता।
ग्रामीण अस्पतालों पर पड़ेगा ज्यादा असर
पत्र में कहा गया है कि पिछले तीन दशकों से हेल्थकेयर नियोक्ता H-1B वीजा कार्यक्रम के जरिए चिकित्सकों, एडवांस प्रैक्टिस प्रोफेशनल्स, लैब वर्कर्स और शोधकर्ताओं की भर्ती करते रहे हैं। इनमें से कई विशेषज्ञ ग्रामीण और कम आय वाले शहरी इलाकों में सेवाएं देते हैं।
सांसदों ने चेतावनी दी कि 1 लाख डॉलर की फीस से ग्रामीण अस्पताल और आर्थिक रूप से कमजोर शहरी अस्पताल सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इससे पहले से वित्तीय संकट झेल रहे अस्पतालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कई जरूरी पद खाली रह सकते हैं।
व्यापक समर्थन
यह पत्र प्रतिनिधि सभा की सदस्य यवेट डी. क्लार्क और माइकल लॉरलर के नेतृत्व में भेजा गया है। इसे सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड समेत दोनों सदनों के कई सांसदों का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन मेडिकल कॉलेजेज, ग्रेटर न्यूयॉर्क हॉस्पिटल एसोसिएशन और कैलिफोर्निया मेडिकल एसोसिएशन जैसे प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
भारतीय पेशेवरों पर असर
H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी नियोक्ता विशेष पेशेवर क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त कर सकते हैं। हर साल इस वीजा के सबसे अधिक लाभार्थी भारतीय नागरिक होते हैं, जो टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं।
हाल के वर्षों में H-1B नीति को लेकर बहस तेज हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय डॉक्टर और विशेषज्ञ अमेरिका के ग्रामीण और वंचित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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