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शांतिनी नायडू का पेशेवर नेटवर्क और अपनी भारतीय जड़ों की खोज

वह ऑस्ट्रेलिया-भारत के मजबूत संबंधों को लेकर आशावादी हैं, खासकर क्रिकेट सहित खेल के क्षेत्र में।

 शांतिनी नायडू शांतिनी नायडू / Ishani Duttagupta

शांतिनी नायडू भारतीय मूल की चौथी पीढ़ी की महिला हैं, जिनका जन्म दक्षिण अफ्रीका में हुआ था और वर्तमान में वे सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं। सेंट विंसेंट कुरेन फाउंडेशन की सीईओ के रूप में, वे न्यू साउथ वेल्स में सेंट विंसेंट अस्पतालों के लिए सरकारी अनुदान की कमी को पूरा करने के प्रयासों का नेतृत्व करती हैं। हालांकि उन्होंने पहली बार 2003 में भारत की यात्रा की थी, लेकिन वैश्विक भारतीय नेताओं के एक गैर-लाभकारी संगठन, इंडिआस्पोरा से जुड़ने के बाद अपनी जड़ों से उनका जुड़ाव और भी गहरा हो गया।

संगठन द्वारा ऑस्ट्रेलिया में परिचालन शुरू करने के बाद से, नायडू की भारत यात्राएं नियमित हो गई हैं। 2023 में नई दिल्ली में आयोजित इंडिआस्पोरा के एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, उन्होंने खुद को हर साल भारत लौटते हुए पाया। हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित इंडिआस्पोरा फोरम में भाग लेने वाली नायडू कहती हैं, "मुझे आखिरकार अपनी भारतीय विरासत से फिर से जुड़ने का अवसर मिला है। मैं हर साल यहां आने लगी हूं।"

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वह ऑस्ट्रेलिया के गैर-लाभकारी क्षेत्र की सबसे अनुभवी और कुशल नेताओं में से एक हैं और उन्होंने कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है, जिनमें नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक निदेशक, टैरोंगा और वेस्टर्न प्लेन्स चिड़ियाघरों में धनसंग्रह प्रमुख और सिडनी ओपेरा हाउस में विकास और विपणन निदेशक शामिल हैं। वह सेंट विंसेंट कुरेन ट्रस्टी लिमिटेड की कंपनी सचिव भी हैं, जो जेडब्ल्यू एंड एम कनिंघम फाउंडेशन और एलन एंड लिन रिज फाउंडेशन के न्यासी के रूप में कार्य करती है। और अब, भारतीय संबंधों का महत्व व्यक्तिगत विरासत से परे उनके पेशेवर नेतृत्व तक फैला हुआ है। सेंट विंसेंट कुरेन फाउंडेशन की सीईओ के रूप में - जो ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी गैर-लाभकारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की धनसंग्रह शाखा है - उन्होंने रणनीतिक वैश्विक साझेदारियों को स्थापित करने के लिए इंडिआस्पोरा नेटवर्क का लाभ उठाया है। सबसे उल्लेखनीय रूप से, इसने जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय में गुप्ता-क्लिंस्की इंडिया इंस्टीट्यूट के साथ सहयोग को जन्म दिया।

नायडू बताती हैं कि यह संबंध पिछले साल अबू धाबी में आयोजित इंडिआस्पोरा फोरम फॉर गुड में शुरू हुआ और दिल्ली में हमारी दोबारा मुलाकात से और भी मजबूत हुआ। चूंकि दोनों संगठन परोपकार के माध्यम से चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने और मरीजों के इलाज के परिणामों में सुधार लाने के मिशन को साझा करते हैं, इसलिए साझेदारी स्वाभाविक थी। वे भारत में कई प्रभावशाली कार्यक्रमों का समर्थन भी करती हैं।

नायडू सेंट विंसेंट अस्पतालों के विजन और मिशन को साकार करने के लिए धन जुटाने के प्रयासों की प्रमुख हैं।वे कहती हैं कि उनका फाउंडेशन विकास, नवाचार, अनुसंधान कार्यक्रमों और रोगी देखभाल कार्यक्रमों जैसे क्षेत्रों का भी समर्थन करता है, जो सामान्य कामकाज से कहीं आगे जाते हैं। सेंट विंसेंट कुरेन फाउंडेशन दान और कॉर्पोरेट समर्थन के माध्यम से प्रतिवर्ष 5 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि जुटाता है, जिससे यह उन पहलों को अंजाम दे पाता है जो सरकार द्वारा वित्त पोषित नहीं हैं, लेकिन रोगियों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करती हैं।

बकौल नायडू गुप्ता-क्लिंस्की संस्थान भारत में जन स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कार्यरत कई संस्थानों और व्यक्तियों को एक मंच पर लाता है। यह उन क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करता है जहां जलवायु परिवर्तन, डिजिटल स्वास्थ्य या स्वास्थ्य में एआई और डेटा साइंस के उपयोग के इर्द-गिर्द अधिक अंतःविषयक कार्यक्रम किए जा सकते हैं। यह संस्थान छात्रों, संकाय सदस्यों और पूर्व छात्रों सहित विभिन्न विशेषज्ञता क्षेत्रों के लोगों को एक साथ लाता है ताकि चुनौतियों का समाधान किया जा सके और भारत में कार्यक्रमों का निर्माण और कार्यान्वयन किया जा सके। और हमें इसमें एक अच्छा तालमेल दिखाई देता है। 

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