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सुहास की चेतावनी: भारतीय प्रतिभा खो रहा है अमेरिका, इमिग्रेशन व्यवस्था में हो सुधार

सुब्रमण्यम ने कहा कि उनके ऑफिस की अपने क्षेत्र के लोगों के साथ होने वाली कई बातचीत में इमिग्रेशन से जुड़ी चिंताएं हावी रहती हैं।

 कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम / House Floor

कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम ने 23 जून को चेतावनी दी कि वीजा और ग्रीन कार्ड के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट (बैकलॉग) की वजह से अमेरिका भारत से बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित करने और उन्हें अपने यहां बनाए रखने में पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन में सुधार भारतीय-अमेरिकियों के सामने सबसे जरूरी मुद्दों में से एक है।

'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) की ओर से कैपिटल हिल में आयोजित एक कार्यक्रम में वर्जीनिया के डेमोक्रेट नेता ने कहा कि अमेरिका का मौजूदा कानूनी इमिग्रेशन सिस्टम अब वैसा नहीं रहा, जिसकी वजह से उनके परिवार को अमेरिका में बसने और जिंदगी बनाने का मौका मिला था।

सुब्रमण्यम ने बताया कि मेरे माता-पिता 1978 में भारत से यहां आए थे। उन्हें एयरपोर्ट पर ही ग्रीन कार्ड मिल गया था, अगर आप यकीन करें तो। मगर आज कई भारतीय प्रवासियों को ग्रीन कार्ड के लिए महीनों नहीं, बल्कि सालों तक इंतजार करना पड़ता है। उन्हें ग्रीन कार्ड पाने के लिए 15 साल इंतज़ार नहीं करना पड़ा था। अगर मौजूदा नियम तब लागू होते, तो वे शायद कभी यहां आते ही नहीं।

सुब्रमण्यम की ये बातें तब सामने आईं जब भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य, इमिग्रेशन पॉलिसी और सार्वजनिक जीवन में भारतीय-अमेरिकियों की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करने के लिए वॉशिंगटन में कानून बनाने वाले, राजनयिक और कम्युनिटी लीडर्स इकट्ठा हुए थे।

कांग्रेस सदस्य ने तर्क दिया कि इमिग्रेशन में देरी न सिर्फ परिवारों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है, बल्कि अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी कमजोर कर रही है। हम भारत से आने वाले बहुत सारे टैलेंट का फायदा नहीं उठा पा रहे।

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अमेरिका में ज्यादा स्किल्ड प्रवासियों के मामले में भारत सबसे बड़े स्रोतों में से एक बना हुआ है, खासकर टेक्नोलॉजी, मेडिकल, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक रिसर्च के क्षेत्र में। फिर भी, अमेरिकी इमिग्रेशन कानून में देश-विशिष्ट सीमाओं के कारण भारतीय नागरिकों को अक्सर रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए सबसे लंबा इंतजार करना पड़ता है।

सुब्रमण्यम ने कहा कि उनके ऑफिस में लोगों के साथ होने वाली बातचीत में इमिग्रेशन से जुड़ी चिंताएं अहम होती हैं। मुझे हर दिन फोन कॉल आते हैं। ये समस्याएं सिर्फ रोजगार-आधारित इमिग्रेशन तक ही सीमित नहीं हैं। लोग अपने परिवारों से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, और उनके परिवार भी भारत से उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं। इतना बैकलॉग और लोगों की निराशा देखकर बहुत बुरा लगता है।

वर्जीनिया के कांग्रेसमैन ने कहा कि कांग्रेस में इन देरी की समस्याओं को हल करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि मेरी सबसे अहम प्राथमिकताओं में से एक यह पक्का करना है कि हम इन मुद्दों को हल कर सकें।

कांग्रेस के सबसे नए भारतीय-अमेरिकी सदस्यों में से एक, सुब्रमण्यम ने इस मौके का इस्तेमाल समुदाय के युवा सदस्यों के बीच नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए भी किया।


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