बेथनी पोलोस मॉरिसन / Bethany Poulos Morrison via X
बीती 23 जून को अमेरिकी विदेश विभाग की एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया और कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) द्वारा कैपिटल हिल में आयोजित एक कार्यक्रम में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विदेश विभाग की डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध अब केवल दिखावटी बातों के बजाय ठोस नतीजे देने पर केंद्रित हो रहे हैं।
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मॉरिसन ने नई दिल्ली के साथ संबंधों को लेकर ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका-भारत संबंध ही भविष्य हैं। विदेश विभाग में भारत और दक्षिण एशिया से जुड़ी नीतियों को देखने वालीं मॉरिसन ने बताया कि प्रशासन में शामिल होने के बाद उन्होंने विशेष रूप से भारत से जुड़े काम (पोर्टफोलियो) की मांग की थी, क्योंकि वह इसे वॉशिंगटन के सबसे अहम विदेश नीति संबंधों में से एक मानती थीं।
उन्होंने कहा कि मुझे लगा कि यह हमारे सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है। उन्होंने अमेरिका को आकार देने में भारतीय-अमेरिकियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए अपनी बात शुरू की और इस समुदाय को देश की कहानी का एक अभिन्न अंग बताया, क्योंकि अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है।
मॉरिसन ने कहा कि यह एक जीवंत समुदाय है। इसने बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने व्यापार, तकनीक और सरकार के क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकी नेतृत्व की ओर इशारा किया और माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, आईबीएम और एडोब जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि ये नेता - अमेरिकी कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, आईबीएम और एडोब में भारतीय-अमेरिकी नेता - अमेरिका की आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मॉरिसन ने बताया कि उन्होंने हाल ही में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के साथ भारत के चार शहरों - नई दिल्ली, कोलकाता, आगरा और जयपुर - की यात्रा की थी। उन्होंने इसे एक सघन यात्रा बताया और कहा कि यह भारत के साथ संबंध मजबूत करने के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का सबूत है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच नतीजों पर केंद्रित संबंधों को दर्शाती है। मॉरिसन ने कहा कि हम बैठकों के आधार पर नहीं, बल्कि नतीजों के आधार पर आकलन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि व्यापार प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बना हुआ है। मॉरिसन ने बताया कि वाशिंगटन और नई दिल्ली एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में, हमने ऐतिहासिक व्यापार समझौते को आखिरकार पूरा करने का इरादा जाहिर किया था। हम इसके बहुत ही करीब हैं।
मॉरिसन के अनुसार, यह समझौता 1.4 अरब लोगों वाले भारत के बाजार को अमेरिकी सामानों के लिए ऐसे नियमों के तहत खोलने में मदद करेगा जो दोनों पक्षों के लिए समान और फायदेमंद हों।
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