सांकेतिक / Hindus for Human Rights
अमेरिका के 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' ग्रुप ने भारत सरकार से अपील की है कि वह तुरंत क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से बातचीत करे। ग्रुप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कदम नहीं उठाया गया, तो लोगों की जान जा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे एक खुले पत्र में, संगठन ने बातचीत, मेडिकल सुविधा और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ी चिंताओं पर साफ-साफ जवाब देने की मांग की।
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उनके डॉक्टरों के मुताबिक, 18 दिन की हड़ताल के बाद वांगचुक का वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो गया था और उनकी सेहत काफी गिर गई थी। टीम ने यह भी बताया कि कम से कम तीन छात्र प्रदर्शनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से एक का इलाज 'हाइपोवोलेमिक शॉक' के लिए किया गया।
'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' ने कहा कि भले ही प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सरकार को उन चिंताओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो लाखों छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं पर असर डालती हैं।
संगठन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनीता विश्वनाथ ने एक बयान में कहा कि हिंदू होने के नाते हमें सिखाया जाता है कि धर्म का मतलब है अन्याय के सामने हिम्मत दिखाना और उन लोगों का ख्याल रखना जिनकी जान खतरे में है। भूख हड़ताल कोई तमाशा नहीं है। यह तब की स्थिति है जब सारे आम रास्ते बंद हो जाते हैं और सत्ता सुनने से इनकार कर देती है। अगर सरकार की बात सुनने से पहले लोगों को भूखा रहना पड़े, तो यह चुप्पी ही अन्याय है। सरकार को अभी प्रदर्शनकारियों से मिलना चाहिए, उन नाकामियों का जवाब देना चाहिए जिनकी वजह से वे यहां तक पहुंचे हैं, और उदासीनता के कारण किसी की जान जाने से पहले कदम उठाना चाहिए।
संगठन ने अधिकारियों से अपील की कि वे प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए एक अधिकृत प्रतिनिधि भेजें, मेडिकल सुविधा तक बिना रोक-टोक पहुंच सुनिश्चित करें, छात्रों द्वारा उठाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से बात करें, परीक्षा और भर्ती में गड़बड़ियों की जांच के लिए एक समय-सीमा वाली प्रक्रिया बनाएं और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करें।
पत्र में वांगचुक और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से अपनी सेहत को प्राथमिकता देने की भी अपील की गई और कहा गया कि उनकी चिंताएं पहले ही पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों तक पहुंच चुकी हैं।
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