ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

मिलानो कोर्टिना पैरालंपिक पर बहिष्कार का खतरा, रूस-बेलारूस की एंट्री से बवाल

1980 में अमेरिका ने सोवियत संघ के अफगानिस्तान पर हमले के विरोध में मॉस्को ओलंपिक का बहिष्कार किया था

 मिलानो कोर्टिना पैरालंपिक लोगो मिलानो कोर्टिना पैरालंपिक लोगो / paralympic-org

ओलंपिक का मूल मंत्र पूरी दुनिया को एक छत के नीचे लाना है, लेकिन राजनीति इस मंत्र को हर बार चुनौती देती है। इतिहास गवाह है कि किस तरह राजनीति ने इस वैश्विक खेल महाकुंभ में दखल दिया है, बाधाएं पैदा की हैं और कई बार इसे ठप भी किया है। अब एक बार फिर मिलानो कोर्टिना 2026 शीतकालीन पैरालंपिक खेलों पर बहिष्कार का खतरा मंडराने लगा है। वजह है इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी (आईपीसी) का रूस और बेलारूस को अपने राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीकों के साथ खेलों में भाग लेने की अनुमति देना।

आईपीसी के फैसले के खिलाफ बढ़ता विरोध
आईपीसी के इस फैसले के खिलाफ यूक्रेन, लातविया और मेजबान देश इटली सहित कई देशों ने नाराजगी जताई है। लातविया ने तो यहां तक ऐलान कर दिया है कि वह उद्घाटन समारोह में किसी भी रूप में भाग नहीं लेगा। लातवियाई पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष डाइगा दादजीते ने साफ किया कि उनका देश रूस और बेलारूस को राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ भाग लेने की अनुमति को स्वीकार नहीं करता।

यह भी पढ़ें- भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता की हालत गंभीर, CCU में भर्ती

यूक्रेन पहले ही उद्घाटन समारोह का बहिष्कार कर चुका है। वहीं चेक गणराज्य और कई यूरोपीय देशों ने भी इस फैसले की आलोचना की है।

इटली सरकार भी असहमत
मेजबान देश इटली की सरकार ने भी रूस और बेलारूस को राष्ट्रीय ध्वज के साथ शामिल करने के आईपीसी के फैसले से असहमति जताई है। इटली के खेल मंत्री एंड्रिया अबोदी ने कहा, "हम चाहते हैं कि रूसी और बेलारूसी एथलीट प्रतिस्पर्धा करें, लेकिन तटस्थ क्षमता में।"

This post is for paying subscribers only

SUBSCRIBE NOW

Comments

Leave A Comment

Required fields are marked (*).

Related

Talk to us?