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मालविका चौधरी
प्रमिला जयपाल / Wikimedia commons
कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल ने 1 अप्रैल को अदालत के एक फैसले का स्वागत किया। यह फैसला 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद भवन पर हुए हमले से जुड़े एक मामले में आया है। उन्होंने कहा कि इससे डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराने की दिशा में मजबूती मिलेगी। यह फैसला जिला न्यायाधीश अमित मेहता ने दिया है।
उन्होंने ट्रंप की उस दलील को काफी हद तक खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति पद की छूट का हवाला दिया था। इस वजह से अब मामले के अहम हिस्सों पर अदालत में सुनवाई आगे बढ़ेगी। इनमें ट्रंप का भाषण और उस दिन दिए गए उनके बयान शामिल हैं। प्रमिला जयपाल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने 6 जनवरी को लोगों को भड़काया था। अब हम उन्हें जिम्मेदार ठहराने के एक कदम और करीब हैं।
उन्होंने इस फैसले को उम्मीद जगाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है। लेकिन यह फैसला एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि हम ट्रंप को जवाबदेह ठहराने के और करीब आ गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह फैसला आगे भी कायम रहेगा।
जयपाल ने कहा कि जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। यह उन लोगों के लिए भी जरूरी है जो उस दिन संसद में मौजूद थे और पूरे देश के लिए भी जरूरी है। हमें न्याय के लिए प्रयास जारी रखना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो ऐसा दोबारा हो सकता है।
यह मामला उन कई मुकदमों में से एक है जो उस हमले के बाद दर्ज किए गए। ये मुकदमे सांसदों और पुलिस अधिकारियों ने दायर किए थे। उनका कहना है कि उस दिन उनकी जान को खतरा हुआ था। प्रमिला जयपाल भी उन सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने ट्रंप के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला 6 जनवरी 2021 की घटना से जुड़ा है। उस दिन भीड़ ने संसद भवन में घुसकर चुनाव नतीजों की प्रक्रिया को रोक दिया था।
उस समय जो बाइडेन की जीत की पुष्टि हो रही थी। जयपाल ने कहा कि उस दिन मुझे नहीं पता था कि मैं बच पाऊंगी या नहीं। उन्हें यह भी नहीं पता था कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था सुरक्षित रहेगी या नहीं। न्यायाधीश अमित मेहता ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप को पूरी तरह कानूनी छूट नहीं मिल सकती। खासतौर पर उनके भाषण और उस दिन दिए गए सार्वजनिक बयानों को लेकर।
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