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अपने देश को मालामाल करने में भारतीय प्रवासी सबसे आगे, नई रिपोर्ट से लगी मुहर

प्रवासन एवं विकास मामलों पर विश्व बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में प्रवासियों ने भारत में करीब 125 अरब डॉलर की चौंकाने वाली रकम भेजी। निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में कुल रेमिटेंस 2023 में लगभग 669 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

रेमिटेंस के मामले में भारतीय प्रवासी दुनिया में अव्वल हैं। / साभार सोशल मीडिया

विदेश में रहते हुए अपने देश में पैसा भेजने के मामले में भारतीयों का जवाब नहीं। दूसरे शब्दों में कहें तो रेमिटेंस के मामले में वह दुनिया के बाकी सभी देशों से अव्वल हैं। वर्ल्ड बैंक की एक हालिया रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है। 

प्रवासन एवं विकास मामलों पर विश्व बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में प्रवासियों ने भारत में करीब 125 अरब डॉलर की चौंकाने वाली रकम भेजी। निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में कुल रेमिटेंस 2023 में लगभग 669 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत का हिस्सा 125 बिलियन डॉलर रहा, जो उससे पिछले साल से 111.22 बिलियन डॉलर ज्यादा है। इस तरह दक्षिण एशियाई रेमिटेंस में भारत का योगदान 2023 में 66% तक हो गया, जो 2022 में 63% था।

रेमिटेंस में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले देशों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर प्रमुख रहे। इन तीनों देशों से रेमिटेंस में सामूहिक योगदान करीब 36% रहा। इनके अलावा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देश खासकर संयुक्त अरब अमीरात ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में 18% रकम भेजी। अधिकृत डीलर बैंकों के माध्यम से 2020-21 के लिए आरबीआई द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार ऑस्ट्रेलिया 0.7% पर रहा था।

रेमिटेंस में इस बढ़ोतरी के लिए भारत सरकार की कई पहल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसमें सिंगापुर के पेमेंट सिस्टम के साथ भारत के यूपीआई के जुड़ाव और भारत व यूएई के बीच स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन प्रमुख रहे। भारत द्वारा विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के लिए आकर्षक गैर-आवासीय जमा योजनाओं की भी भूमिका रही। 

हालांकि विश्व बैंक की रिपोर्ट में साल 2024 में संभावित जोखिमों के बारे में भी आगाह किया गया है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक मुद्रास्फीति और विकास की संकुचित संभावनाओं के कारण 2024 में प्रवासियों की वास्तविक आय में गिरावट की संभावना है। हालांकि आने वाले वर्षों में निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में रेमिटेंस बढ़ने की उम्मीद है, धीमी रफ्तार से ही सही। 

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