प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति / Reuters
बीती 23 जून को कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने भारतीय-अमेरिकियों से अधिक राजनीतिक रूप से सक्रिय होने और चुनाव लड़ने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए समुदाय का जुड़ाव पहले से कहीं जरूरी हो गया है।
कैपिटल हिल में भारतीय-अमेरिकी नेताओं और समर्थकों की एक सभा में बोलते हुए, इलिनोइस के डेमोक्रेट नेता ने समुदाय की असाधारण उपलब्धियों की तारीफ़ की, लेकिन साथ ही आगाह किया कि ऐसे समय में जब देश के कुछ हिस्सों में पूर्वाग्रह और भेदभाव साफ़ दिख रहे हैं, तब आत्म-संतुष्ट नहीं होना चाहिए। कृष्णमूर्ति ने कहा कि हिंदू-विरोधी, भारत-विरोधी और 'देसी'-विरोधी नफरत बढ़ रही है।
राष्ट्रीय राजनीति में सबसे प्रमुख भारतीय-अमेरिकियों में से एक, इस कांग्रेसमैन ने समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों के उदाहरण के तौर पर हाल ही में उन पर हुए हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले, फ्लोरिडा के एक चुने हुए अधिकारी ने मुझे देश से बाहर निकालने की मांग की थी। मैं कहीं नहीं जा रहा हूं, क्या आप जा रहे हैं?
उनकी बातों पर फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) के कैपिटल हिल कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। इस कार्यक्रम में 25 राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
कृष्णमूर्ति ने भारतीय-अमेरिकियों को अमेरिका के सबसे सफल समुदायों में से एक बताया और चिकित्सा, व्यापार, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों का जिक्र किया।
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उन्होंने कहा कि आप देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला जातीय अल्पसंख्यक समुदाय हैं। आप सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे और सबसे समृद्ध हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर, कारोबारियों और 'स्पेलिंग बी' चैंपियन के तौर पर भारतीय-अमेरिकियों की बड़ी संख्या है। उन्होंने कहा कि आधुनिक अमेरिका में इस समुदाय की सफलता की कहानी सबसे शानदार कहानियों में से एक है।
उन्होंने कहा कि आपने अपनी जगह बना ली है। फिर भी, उन्होंने कहा कि सिर्फ सफलता से ही प्रभाव या भेदभाव से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। कृष्णमूर्ति ने कहा कि वह नफरत, कट्टरता, पूर्वाग्रह और भेदभाव जो आप पर, आपके परिवारों पर, मुझ पर और हम सब पर केंद्रित है, उसके लिए अमेरिका में कोई जगह नहीं है।
राजा ने कहा कि इसका सबसे अच्छा जवाब सार्वजनिक जीवन में अधिक भागीदारी है। अब और ज्यादा शामिल होने का समय आ गया है - पहले से कहीं ज्यादा।
उन्होंने भारतीय-अमेरिकियों को अपने समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर आवाज उठाने और नागरिक व राजनीतिक संस्थाओं में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आपको आवाज उठानी होगी, बोलना होगा, सामने आना होगा और यह पक्का करना होगा कि आपकी आवाज हर जगह सुनी जाए।
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