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कैंसर के इलाज पर रिसर्च कर रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिक सलिल गर्ग को मिला यह पुरस्कार

NIH ने भारतीय मूल के वैज्ञानिक सलील गर्ग को हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया है। गर्ग की प्रयोगशाला स्टेम सेल और कैंसर के अध्ययन पर केंद्रित है, जिसका अंतिम लक्ष्य इस ज्ञान को नए कैंसर निदान विकसित करने के लिए लागू करना है।

येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के इंडियन-अमेरिकन प्रोफेसर ऑफ लेबोरेटरी मेडिसिन सलील गर्ग / mage - Yale

येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के इंडियन-अमेरिकन प्रोफेसर ऑफ लेबोरेटरी मेडिसिन सलील गर्ग को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड (HRHR) न्यू इनोवेटर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह मान्यता उनके अनुवांशिक रूप से भिन्नता पर इनोवेटिव रिसर्च को सपोर्ट करती है। यह ऐसी घटना है जिसमें एक ही जेनेटिक मेकअप वाले सेल सिस्टम अलग-अलग स्टेट और फंक्शन बना सकते हैं।

गर्ग का शोध जीनोमिक्स, आणविक जीव विज्ञान, कोशिका जीव विज्ञान, सिस्टम जीव विज्ञान और मशीन लर्निंग को जोड़ता है जिससे यह पता लगाया जा सके कि एक समान परिस्थितियों में कोशिकाओं के बीच अंतर कैसे उत्पन्न होते हैं। उनकी प्रयोगशाला स्टेम सेल और कैंसर के अध्ययन पर केंद्रित है, जिसका अंतिम लक्ष्य इस ज्ञान को नए कैंसर निदान विकसित करने के लिए लागू करना है।

न्यू इनोवेटर अवॉर्ड जो NIH के HRHR रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा है, उन शोधकर्ताओं को सपोर्ट करता है जो असाधारण रूप से नए प्रयोग पर काम कर रहे हैं। यह उन शोधकर्ताओं को दिया जाता है जिन्होंने अपनी आखिरी डिग्री या क्लिनिकल रेजिडेंसी पूरी करने के 10 साल के भीतर अभी तक NIH की कोई बड़ी ग्रांट नहीं मिली है।

येल में शामिल होने से पहले गर्ग ने शिकागो विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके अलावा हार्वर्ड-MIT संयुक्त कार्यक्रम के माध्यम से MD-PhD ट्रेनिंग प्राप्त की। उनके काम ने यह तलाश किया कि छोटे नियामक RNA अणु प्रतिरक्षा प्रणाली में कोशिका इंटरैक्शन को कैसे प्रभावित करते हैं। गर्ग ने बाद में MIT के कोच इंस्टीट्यूट फॉर इंटीग्रेटिव कैंसर रिसर्च में एक पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप पूरी की, इसके बाद 2022 में येल में अपनी खुद की प्रयोगशाला शुरू की।

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