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भारतीय-अमेरिकी विशेषज्ञ एश्ले टेलिस की हिरासत मांग पर कड़ा विरोध

अब अदालत को यह तय करना है कि क्या सरकार ने ऐसा कोई नया और महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किया है, जो दोबारा सुनवाई का आधार बने।

भारतीय अमेरिकी एश्ले टेलिस / Wikipedia

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हिरासत की दोबारा मांग किए जाने के बाद भारतीय-अमेरिकन विदेशी नीति विशेषज्ञ एश्ले जे. टेलिस इस हफ्ते एक बार फिर संघीय अदालत पहुंचे। टेलिस की ओर से दायर नई अर्जी में कहा गया है कि सरकार ने उनकी रिहाई की शर्तें दोबारा खोलने के लिए कोई वैध कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया है।

‘सरकारी याचिका सीधी तरह खारिज होनी चाहिए’-बचाव पक्ष
टेलिस के वकीलों ने दायर दस्तावेजों में लिखा कि संघीय कानून के अनुसार सरकार तभी दोबारा सुनवाई की मांग कर सकती है, जब वह ऐसा नया और महत्वपूर्ण तथ्य पेश करे, जो पिछली सुनवाई के समय ज्ञात न हो। बचाव पक्ष के अनुसार, सरकार जो भी बातें सामने ला रही है, वे न तो नई हैं और न ही महत्वपूर्ण, इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए।

घर में नजरबंदी या हिरासत
विवाद की जड़ यह है कि टेलिस जिन पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री को गलत तरीके से रखने का आरोप है- को अदालत-पूर्व अवधि में घरेलू नजरबंदी में ही रखा जाए या जेल भेजा जाए। आरोप दो दस्तावेजों से जुड़ा है, जिन्हें अभियोग पत्र में “राष्ट्रीय रक्षा सूचना” बताया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि आरोपपत्र में कहीं भी यह दावा नहीं है कि टेलिस ने यह जानकारी किसी को लीक की हो।

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सख्त निगरानी में कोई उल्लंघन नहीं: वकील
21 अक्टूबर से टेलिस इलेक्ट्रॉनिक निगरानी में हैं, उनका पासपोर्ट जमा है और इंटरनेट उपयोग पर रोक है, ये सभी शर्तें अभियोजन और बचाव पक्ष की सहमति से तय हुई थीं। वकीलों का कहना है कि टेलिस ने अब तक सभी शर्तों का कड़ाई से पालन किया है और सरकार द्वारा अब उठाई जा रही चिंताएँ पहले से ही ज्ञात थीं या अप्रासंगिक हैं।

केवल फरार होने का मुद्दा
बचाव पक्ष का तर्क है कि जिस क़ानून के तहत टेलिस पर मामला चल रहा है, उसके तहत सरकार “खतरनाक होने” का मुद्दा नहीं उठा सकती। कानूनी तौर पर वे केवल फरार होने का जोखिम साबित कर सकते हैं और टेलिस का परिवार, घर और समुदाय से मजबूत जुड़ाव इसे गलत साबित करता है।

जांच में पूरा सहयोग
अक्टूबर में हुए सर्च ऑपरेशन के दौरान टेलिस के घर और दफ्तर से दस्तावेज जब्त किए गए थे। बचाव पक्ष कहता है कि सरकार यह जानकारी पहले से “उचित रूप से जान सकती थी”, इसलिए इसे नया सबूत नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि जब टेलिस को बाद में कुछ अतिरिक्त हार्ड ड्राइव और दस्तावेज मिले, जिन्हें एजेंट नहीं ले गए थे, तो उन्होंने उन्हें तुरंत एफबीआई को सौंप दिया।

हिरासत से तैयारी पर असर पड़ेगा
बचाव पक्ष के अनुसार, टेलिस को जेल भेजने से वे मामले की संवेदनशील दस्तावेजों की समीक्षा करने में वकीलों की मदद नहीं कर पाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि हिरासत में रहते हुए उनकी विशेषज्ञता का उपयोग लगभग असंभव हो जाएगा।

अब अदालत को यह तय करना है कि क्या सरकार ने ऐसा कोई नया और महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किया है, जो दोबारा सुनवाई का आधार बने। टेलिस को 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। शुरुआती सुनवाई के बाद अभियोजन ने ही सख्त शर्तों के साथ रिहाई पर सहमति जताई थी। तब से प्रोबेशन अधिकारियों ने “शून्य उल्लंघन” की रिपोर्ट दी है।

टेलिस, जो राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और अमेरिकी विदेश विभाग में वरिष्ठ भूमिकाएं निभा चुके हैं, लंबे समय से दक्षिण एशिया और अमेरिकी विदेश नीति के प्रमुख विश्लेषकों में गिने जाते हैं। उनकी यही पृष्ठभूमि और एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग, बचाव पक्ष के अनुसार, साबित करता है कि वे न तो फरार होने का जोखिम हैं और न ही किसी तरह का खतरा।

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