सांकेतिक चित्र / AI Generated
भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर जा रहा एक तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जानकारी समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली कई वेबसाइटों से मिली है। 'निसोस केरोस' नाम का यह जहाज विशाखापत्तनम जा रहा है और इसके 3 जून तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह जहाज 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था। शुक्रवार सुबह 6 बजे भारतीय समय के अनुसार इसे भारत के पश्चिमी तट के पास उत्तरी अरब सागर में देखा गया।
ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए ने गुरुवार को बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने पिछले 24 घंटों में 23 वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी, जिनमें तेल टैंकर और कंटेनर जहाज शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि ईरानी सेना के अनुसार, सभी जहाजों की आवाजाही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नौसेना अधिकारियों के साथ औपचारिक समन्वय के बाद हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों को कोई शुल्क देना पड़ा या नहीं।
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ईरान पहले ही कह चुका है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क ले सकता है। इसी महीने ईरान ने समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' नाम की एजेंसी बनाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने के लिए शुल्क वसूलने को अवैध बताया है।
अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह जलडमरूमध्य में स्वतंत्र आवाजाही बहाल करे। फरवरी में अमेरिका द्वारा इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी करने के बाद ईरान ने इस मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं और जहाजों पर हमले किए थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र आवाजाही बहाल करना ईरान युद्ध खत्म करने की बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि यह जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा।
ईरान की कार्रवाई से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत गैस और तेल सप्लाई प्रभावित हुई है जो इसी रास्ते से गुजरती है। इससे वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक संकट गहरा गया है।
बुधवार को अचानक ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ओमान ने ईरान के साथ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क वसूलने को लेकर कोई समझौता किया, तो अमेरिका ओमान पर हमला कर सकता है। ओमान, ईरान के सामने जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है।
जहाजों की जानकारी रखने वाली संस्था ऑकविसर के अनुसार विशाखापत्तनम की ओर आ रहे जहाज निसोस केरोस' का मालिक अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन है और इसका संचालन किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन कर रही है।
हुंडई द्वारा निर्मित यह जहाज 333 मीटर लंबा है और इसकी क्षमता 3,18,744 टन या 3,38,648 घन मीटर है।
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