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ब्राउन यूनिवर्सिटी फायरिंग के बाद भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने कर दी ये बड़ी मांग

घटना के बाद भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

 (शीर्ष) बाएं से दाएं: प्रतिनिधि रो खन्ना, जोहरान ममदानी, (नीचे) बाएं से दाएं: प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल, प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति (शीर्ष) बाएं से दाएं: प्रतिनिधि रो खन्ना, जोहरान ममदानी, (नीचे) बाएं से दाएं: प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल, प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति / Courtesy: File Photo/Reuters

अमेरिका के रोड आइलैंड राज्य स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में 14 दिसंबर को हुई गोलीबारी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और गन सुधार कानूनों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने इस घटना को ‘भयानक सामूहिक गोलीबारी’ बताया। उन्होंने कहा कि हमें इस तरह जीने की जरूरत नहीं है। गन सुरक्षा कानून पारित न कर पाना एक नैतिक असफलता है जिसकी कीमत बार-बार निर्दोष अमेरिकी चुका रहे हैं।

सांसद प्रमिला जयपाल ने भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि यह बहुत गलत है कि ऐसी सामूहिक गोलीबारी लगातार हो रही है। यह हमें मजबूर कर रही है कि हम ठोस गन सुधार कानून लागू करें।

सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने ब्राउन यूनिवर्सिटी समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रोविडेंस में हुई इस दर्दनाक गोलीबारी के बाद मेरा दिल ब्राउन यूनिवर्सिटी समुदाय के साथ है। हम मारे गए और घायल लोगों के लिए शोक व्यक्त करते हैं। अब कांग्रेस को गन हिंसा खत्म करने के लिए कदम उठाने होंगे।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर-इलेक्ट जोहरान क्वामे ममदानी ने भी इस घटना पर विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने अमेरिका में गन हिंसा को महामारी बताया। उन्होंने कहा कि जो हिंसा कभी अकल्पनीय थी, वह अब खतरनाक रूप से सामान्य बन गई है। लेकिन बाकी महामारियों के उलट, इसका इलाज हमारे पास है। अगर हम चाहें तो इस दर्द को खत्म कर सकते हैं।

ममदानी ने पीड़ितों के परिवारों और ब्राउन यूनिवर्सिटी समुदाय के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि देश को इस दर्द के प्रति सुन्न नहीं होना चाहिए और गन हिंसा खत्म करने के प्रयासों को फिर से तेज करना चाहिए।

यह हमला सैंडी हुक एलीमेंट्री स्कूल फायरिंग की बरसी से ठीक पहले हुआ जिससे अमेरिका में एक बार फिर गन नियंत्रण कानूनों को लेकर बहस तेज हो गई है।

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