प्रोफेसर डॉ. रामजी प्रसाद, प्रभावशाली किताब 'द C5 मॉडल: अ ह्यूमन-सेंट्रिक फ्रेमवर्क फॉर द फ्यूचर डिजिटल सोसाइटी' के लेखक हैं। / Handout
जैसे-जैसे दुनिया 5G नेटवर्क का दायरा बढ़ा रही है, रिसर्चर और टेक्नोलॉजी लीडर वायरलेस कम्युनिकेशन के अगले दौर यानी 6G की नींव रख रहे हैं। इस ग्लोबल बदलाव में सबसे आगे हैं रामजी प्रसाद, जो एक जाने-माने टेलीकम्युनिकेशन साइंटिस्ट हैं। उनकी शुरुआती रिसर्च ने वायरलेस टेक्नोलॉजी के विकास पर गहरा असर डाला है।
IEEE, IET, IETE और WWRF के फेलो रहे प्रसाद, CTIF ग्लोबल कैप्सूल (CGC) के फाउंडर प्रेसिडेंट और भारत के लिए ग्लोबल ICT स्टैंडर्डाइजेशन फोरम के फाउंडर चेयरमैन हैं।
टेलीकम्युनिकेशन रिसर्च और एजुकेशन में उनके योगदान के लिए उन्हें कई इंटरनेशनल सम्मान मिले हैं। इनमें 2023 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया गया 'प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार' और उनके शानदार ग्लोबल योगदान के लिए डेनमार्क की रानी द्वारा दिया गया 'नाइट ऑफ द ऑर्डर ऑफ द डैनब्रोग' सम्मान शामिल है।
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कई दशकों के एकेडमिक करियर में, प्रसाद ने 50 से अधिक किताबें लिखी हैं, 1,000 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं, 15 से ज्यादा पेटेंट हासिल किए हैं और 150 से ज्यादा Ph.D. स्कॉलर्स के साथ-साथ 250 से ज्यादा मास्टर्स स्टूडेंट्स को गाइड किया है।
उनके कई पुराने स्टूडेंट्स अब ग्लोबल टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्री में लीडरशिप की भूमिकाओं में हैं। वे अभी भारत की शारदा यूनिवर्सिटी के शारदा स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड साइंस में प्रोफेसर एमेरिटस के तौर पर काम कर रहे हैं और साथ ही इंटरनेशनल रिसर्च सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।
हाल ही में टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी डबलिन में "6G: द रोड टू द फ्यूचर ऑफ वायरलेस टेक्नोलॉजीज 2030" (6G: वायरलेस टेक्नोलॉजी के भविष्य का रास्ता 2030) विषय पर एक लेक्चर के दौरान, प्रो. प्रसाद ने वायरलेस कम्युनिकेशन की अगली पीढ़ी का एक शानदार विजन पेश किया।
उनके भाषण में इस बात पर जोर दिया गया कि 6G को सिर्फ तेज कनेक्टिविटी ही नहीं देनी चाहिए, बल्कि एक ऐसा डिजिटल ईकोसिस्टम बनाना चाहिए जो असल में इंसानों पर केंद्रित हो और हेल्थकेयर, एजुकेशन, सस्टेनेबिलिटी, पब्लिक सर्विस और जीवन की कुल गुणवत्ता को बेहतर बनाए।
प्रसाद के अनुसार, भविष्य का 6G नेटवर्क टेराहर्ट्ज कम्युनिकेशन, AI-नेटिव इंटेलिजेंट नेटवर्क, इंटीग्रेटेड सेंसिंग क्षमताएं, डिजिटल ट्विन्स और इमर्सिव होलोग्राफिक कम्युनिकेशन जैसी क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी को एक साथ लाएगा। ये टेक्नोलॉजी अल्ट्रा-लो लेटेंसी, ऑटोनॉमस नेटवर्क मैनेजमेंट और फिजिकल व डिजिटल एनवायरनमेंट के बीच बिना किसी रुकावट के बातचीत को मुमकिन बनाएंगी।
उन्होंने बताया कि भविष्य के कम्युनिकेशन सिस्टम सिर्फ स्मार्टफोन से कहीं ज्यादा चीज़ों को आपस में जोड़ेंगे। पूरे स्मार्ट शहर, ट्रांसपोर्ट सिस्टम, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और इंटेलिजेंट पब्लिक सर्विस एक यूनिफाइड डिजिटल फ्रेमवर्क के जरिए आपस में जुड़ जाएंगे, जिससे इनोवेशन और सामाजिक विकास के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।
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