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अभय दांडेकर: डॉक्टर, पॉडकास्ट होस्ट और सुनने की कला के अभ्यासकर्ता

कैलिफोर्निया के एक बाल रोग विशेषज्ञ ने पॉडकास्ट का उपयोग करके वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय की विविध यात्राओं पर प्रकाश डाला है।

 अभय दांडेकर अभय दांडेकर / Courtesy Photo

डॉ. अभय दांडेकर कैलिफोर्निया में बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उन्हे चिकित्सा क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हालांकि, वे शायद अपने पॉडकास्ट 'ट्रस्ट मी, आई नो व्हाट आई एम डूइंग' के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं, जहां वे वैश्विक भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के प्रमुख लोगों के साथ गहन संवाद करते हैं।

दांडेकर कहते हैं कि कई डॉक्टरों की तरह, मैंने अपने करियर की शुरुआत में ही महसूस किया कि मैं लोगों की मदद करना चाहता हूं, चीजों को ठीक करना चाहता हूं और समस्याओं का समाधान करना चाहता हूं। 

लॉस एंजिलिस में जन्मे और पले-बढ़े तथा बर्कले से शिक्षित, वे अब सैन फ्रांसिस्को के ईस्ट बे में रहते हैं। चिकित्सा के मानवीय पहलू ने ही उन्हें सुनने की कला सिखाई। वे कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवा में, आपको अक्सर असहमत लोगों के बीच मध्यस्थता करनी पड़ती है। गहराई से सुनने की क्षमता सशक्त बनाती है। आपको एहसास होता है कि दूसरों को आप पर पूरी तरह से भरोसा करने के लिए कितने कौशल की आवश्यकता होती है।

इस पॉडकास्ट की शुरुआत सितंबर 2020 में खुले तौर पर बातचीत करने और वैश्विक भारतीयों की यात्राओं को साझा करने के विचार से की गई थी, ताकि प्रवासी समुदाय के अन्य लोग उनसे सीख सकें।

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दांडेकर कहते हैं कि मैं इन कहानियों को व्यापक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना चाहता था ताकि अन्य लोग भी हमारे बारे में जान सकें। लेकिन उनका उद्देश्य केवल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारतीय अमेरिकियों की उपलब्धियों को उजागर करना नहीं था।

वे कहते हैं कि भारतीय अमेरिकी डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है और मैं हर सप्ताह उनमें से किसी एक को अपने पॉडकास्ट में शामिल कर सकता हूं। लेकिन जहां मेरे कुछ अतिथि चिकित्सा क्षेत्र के सबसे बड़े नाम हैं, वहीं मेरे कई अन्य अतिथि अन्य क्षेत्रों में भी बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरक कार्य कर रहे हैं, चाहे अमेरिका में हों या दुनिया के किसी भी हिस्से में।

उनके पॉडकास्ट में अतिथियों में एक शिल्पकार, दुर्लभ पृथ्वी धातुओं का उपयोग न करने वाली इलेक्ट्रिक बैटरी के डिजाइनर, संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय मूल के पहले राष्ट्रीय उद्यान रेंजर, भारतीय मूल के एक मेजर लीग बेसबॉल खिलाड़ी, भारतीय अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य और भारतीय मूल के शेफ शामिल हैं।

उनका मानना ​​है कि अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में भारतीय-अमेरिकी डॉक्टरों की बड़ी संख्या का मुख्य कारण यह है कि 1960 से 1990 के दशक में भारत से आए प्रवासियों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले क्षेत्रों, जैसे चिकित्सा, वित्त, कानून और व्यापार, पर ध्यान केंद्रित किया।

लेकिन वे आगे कहते हैं कि अमेरिका में भारतीय मूल के सभी डॉक्टर खुद को भारतीय नहीं मानते। मुझे अपने भारतीय मूल पर बहुत गर्व है, लेकिन जब मैं किसी मरीज को देखने जाता हूं, तो यह सब मायने नहीं रखता। वहां मैं अपने मरीजों की बात सुनता हूं और उनके प्रति सहानुभूति दिखाता हूं। मेरे लिए सिर्फ यही मायने रखता है कि वे स्वस्थ रहें।

दांडेकर को ऐसा नहीं लगता कि उन्हें अपने चिकित्सा पेशे और पॉडकास्ट के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। बकौल दांडेकर संतुलन का अर्थ है कि जब कोई एक दिशा में जाता है, तो उसे दूसरी दिशा में त्याग करना पड़ता है। लेकिन मैं दोनों में सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहा हूं। मुझे बाल रोग विशेषज्ञ होना पसंद है, मुझे बातचीत करना पसंद है, मुझे लोगों से बात करना, उनसे सीखना और उनके साथ आगे बढ़ना पसंद है। 

उनके माता-पिता 1960 के दशक में अमेरिका में आकर बस गए थे और वे कभी भारत में नहीं रहे, फिर भी भारतीय संस्कृति, भाषा और आस्था उनके पारिवारिक जीवन की आधारशिला बनी हुई है।

वे बताते हैं कि इससे पहचान की एक सूक्ष्म भावना पैदा होती है। मैं खुद को पूरी तरह से 'भारतीय' नहीं कह सकता, फिर भी अपनी देशभक्ति के बावजूद मैं खुद को पूरी तरह से 'अमेरिकी' भी नहीं कह सकता। 

दांडेकर के लिए, सबसे महत्वपूर्ण बात भारतीय-अमेरिकी अनुभव को अपनाना है। अपनी कहानी का जश्न मनाते हुए समुदाय के भीतर मौजूद व्यापक विविधता का सम्मान करना है।
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