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पिट्सबर्ग की संध्या राव और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाने की उनकी कोशिश

न्यू इंडिया अब्रॉड के साथ एक विशेष बातचीत में डॉ संध्या राव ने अपनी शैक्षणिक यात्रा, मार्गदर्शन में दयालुता की शक्ति, कठिन STEM क्षेत्रों में प्रवेश की चुनौतियां और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय मूल के शिक्षकों की खास भूमिका पर विस्तार से बात की।

 डॉ संध्या राव डॉ संध्या राव / Courtesy photo

भारतीय-अमेरिकी खगोल भौतिकी प्रोफेसर डॉ. संध्या राव अपने छात्रों के मन में ऐसी जिज्ञासा पैदा करती हैं जो उन्हें जीवनभर सीखने और सवाल पूछने के लिए प्रेरित करती है। विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM शिक्षा की सबसे मजबूत नींव यही जिज्ञासा है। इसी योगदान के लिए उन्हें हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग द्वारा 2026 का चांसलर डिस्टिंग्विश्ड टीचिंग अवॉर्ड दिया गया था। 

न्यू इंडिया अब्रॉड के साथ एक विशेष बातचीत में डॉ. संध्या राव ने अपनी शैक्षणिक यात्रा, मार्गदर्शन में दयालुता की शक्ति, कठिन STEM क्षेत्रों में प्रवेश की चुनौतियां और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय मूल के शिक्षकों की खास भूमिका पर विस्तार से बात की।

1. आपकी शैक्षणिक यात्रा कैसी रही? विज्ञान और खगोल विज्ञान में शुरुआती रुचि कैसे पैदा हुई?

विज्ञान और गणित बचपन से ही मेरे पसंदीदा विषय थे। मेरे पिता मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में हाई एनर्जी कॉस्मिक रे भौतिक विज्ञानी थे। मेरी मां एक स्कूल शिक्षिका थीं जिन्होंने बचपन से ही मुझे शिक्षा और मेहनत का महत्व सिखाया। मैं ऐसे परिवार में बड़ी हुई जहां विज्ञान और शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता था इसलिए विज्ञान मेरे लिए हमेशा स्वाभाविक लगा। रिश्तेदार मुझे खगोल विज्ञान और विज्ञान की किताबें उपहार में देते थे जिससे मेरी रुचि और बढ़ती गई।

2. आपने 1994 में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय से पीएचडी की और वहीं तीन दशक से अधिक समय से हैं। आपको वहीं रुकने की प्रेरणा क्या मिली?
 

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