ट्रम्प ने दुनियाभर के आयात पर 15 फीसदी टैक्स का ऐलान किया है। / REUTERS/Carlos Barria
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन देशों को सख्त चेतावनी दी है जो अमेरिका के साथ हाल ही में किए गए व्यापार समझौतों से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रम्प के 'आपातकालीन टैरिफ' (IEEPA के तहत) को रद्द किए जाने के बाद, ट्रम्प ने पलटवार करते हुए कहा कि वह अब अलग व्यापार कानूनों के तहत और भी अधिक भारी शुल्क लगाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि जो देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले का फायदा उठाकर "खेल खेलने" की कोशिश करेंगे, उन्हें पहले से कहीं ज्यादा "कठोर और अप्रिय" टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
ट्रम्प प्रशासन ने अब 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का सहारा लिया है, जिसके तहत 24 फरवरी को सुबह 12:01 बजे से सभी देशों से होने वाले आयात पर 15 प्रतिशत का नया अस्थायी आयात शुल्क प्रभावी हो जाएगा। शुरुआत में इसे 10 प्रतिशत रखने की घोषणा की गई थी, लेकिन अगले ही दिन इसे बढ़ाकर अधिकतम कानूनी सीमा यानी 15 प्रतिशत कर दिया गया।
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इस फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है और वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों जैसे डाउ जोन्स और नैस्डैक में गिरावट दर्ज की गई है।
यूरोपीय संघ (EU) ने इस नए टैरिफ के विरोध में अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार सौदे पर मतदान स्थगित कर दिया है। हालांकि, इस नए कानून के तहत कुछ खाद्य पदार्थों, विमान के पुर्जों, महत्वपूर्ण खनिजों और दवाओं जैसी सैकड़ों वस्तुओं को छूट दी गई है, लेकिन अन्य सभी सामानों पर 15 प्रतिशत की मार पड़ेगी।
ट्रम्प ने अपने पोस्ट में उन जजों की भी आलोचना की जिन्होंने उनके खिलाफ फैसला सुनाया, जिनमें उनके द्वारा नियुक्त किए गए दो जज भी शामिल थे।
इस बीच, भारत ने भी अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार सौदे पर बातचीत टाल दी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने संकेत दिए हैं कि प्रशासन अब कई देशों के खिलाफ "अनुचित व्यापार प्रथाओं" (Section 301) की नई जांच शुरू कर सकता है, जिससे भविष्य में और भी टैरिफ लगने का रास्ता साफ हो जाएगा। ट्रम्प की इन धमकियों और नए टैरिफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए 'ट्रेड वॉर' की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।
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