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'इतिहास की झिझक को दूर किया', मोदी के शब्दों में वर्मा ने बयां किया भारत-अमेरिकी संबंध

अमेरिकी उप विदेश सचिव रिचर्ड वर्मा ने कहा कि पिछले 24 वर्षों में भारत और अमेरिकी संबंधों ने अच्छी प्रगति की है। वर्मा ने अमेरिका-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स को 25 साल पूरे करने की बधाई भी दी।

अमेरिका के उप विदेश सचिव रिचर्ड वर्मा। / @DepSecStateMR

'अमेरिका और भारत ने इतिहास की झिझक को पीछे छोड़ दिया है।' 10 दिसंबर को अमेरिका-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स DFW के 25वें सालाना पुरस्कार समारोह में अमेरिकी उप विदेश सचिव रिचर्ड वर्मा ने यह बात कही। वर्मा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला दे रहे थे, जिन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र में यह टिप्पणी की थी।

समारोह में वर्मा ने उपस्थित लोगों से कहा, 'इतिहास की झिझक को पार करना... क्या शानदार शब्द और कितना सही कहा गया है।' उन्होंने कहा, 'देखिए, अमेरिका और भारत के संबंध बहुत पुराने नहीं हैं। महज 75 साल से ज्यादा नहीं हैं। लेकिन दुर्भाग्य से इस इतिहास के अधिकांश समय तक, हम बहुत करीब नहीं थे। दरअसल, बहुतों का कहना होगा कि हम 'परिचित' ही नहीं थे।' 

वर्मा ने ट्रूमैन, आइजनहावर और कैनेडी के समय के दोनों देशों के संबंधों को याद किया। वर्मा ने कहा, ट्रूमैन, आइजनहावर और कैनेडी के साथ हमारी शुरुआत बहुत अच्छी हुई थी। उन्होंने भारत और अमेरिका-भारत संबंधों की अपार संभावना को देखा था। कैनेडी ने अमेरिकी सीनेटर रहते हुए कहा था कि 'एशिया में भाग्य का मोड़ भारत पर निर्भर करता है।' आइजनहावर जब 1959 में भारत में पहले अमेरिकी दूतावास का उद्घाटन करने आए थे, तो उन्होंने यह घोषणा की थी कि अगर युवा भारतीय और अमेरिकी बच्चे सबसे अच्छे दोस्त बनकर बड़े होंगे, तो दुनिया एक सुरक्षित और बेहतर जगह होगी।

लेकिन, वर्मा ने कहा कि 1965 तक, चीजें नाटकीय रूप से बदल गईं। 

उन्होंने आगे कहा, 'हम अपने शीत युद्ध के मतभेदों में उलझे हुए थे। सौहार्दपूर्ण, लेकिन दूर और यह वास्तव में 90 के दशक के अंत तक नहीं बदला। वर्ष 2000 में राष्ट्रपति क्लिंटन के दौरे ने हमारे लंबे समय के अलगाव को तोड़ा। इसके बाद एक नए और महत्वाकांक्षी रिश्ते का समय आ गया। ठीक वैसे ही जैसे आइजनहावर और कैनेडी चाहते थे। एक ऐसा रिश्ता जो साझा मूल्यों पर आधारित हो।'

वर्मा ने आगे कहा कि पिछले 24 वर्षों में दोनों देशों ने अच्छी प्रगति की है। वर्मा ने अमेरिका-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स को 25 साल पूरे करने की बधाई भी दी। उन्होंने अपने संबोधन में एक दिल छू लेने वाली कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा, 'मेरे पिताजी हमेशा हमसे यही कहते थे कि हम सब एक ही जगह से हैं। मेरे पिताजी ने अमेरिका में लगभग कुछ नहीं के साथ शुरुआत की। और हां, उनका बेटा भारत में अमेरिकी राजदूत और अब अमेरिका का उप विदेश सचिव बन गया।' 'केवल अमेरिका में। यही अमेरिकन ड्रीम का वादा है।'

 

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