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अमेरिका-भारत में आतंकवाद-विरोधी सहयोग पर चर्चा, गोरका से मिले क्वात्रा

दोनों प्रतिनिधियों के बीच आतंकवाद के खिलाफ परस्पर सहयोग और इसके विस्तार चर्चा हुई। इस मुलाकात की जानकारी राजूदत क्वात्रा ने X पर साझा की।

 भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और अमेरिकी अधिकारी सेबेस्टियन गोरका। भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और अमेरिकी अधिकारी सेबेस्टियन गोरका। / X@AmbVMKwatra

भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कदमताल पर अपनी प्रतिबद्धता पर मुहर लगाते हुए सहयोग के विस्तार पर चर्चा की है। इसी सिलसिले में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी आतंकवाद-रोधी अधिकारी सेबेस्टियन गोरका से मुलाकात कर वैश्विक आतंकवाद के खतरों और दोनों देशों के सहयोग पर चर्चा की।

दोनों प्रतिनिधियों के बीच आतंकवाद के खिलाफ परस्पर सहयोग और इसके विस्तार चर्चा हुई। आतंकवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई, 26/11 हमले के दोषियों को न्याय दिलाने और सीमा-पार आतंकवाद रोकने पर इस चर्चा में जोर दिया गया। 

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इस मुलाकात की जानकारी राजूदत क्वात्रा ने X पर साझा की। राजदूत क्वात्रा ने लिखा- मैंने राष्ट्रपति के उप सहायक और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में आतंकवाद-विरोधी मामलों के वरिष्ठ निदेशक@SebGorka से एक सार्थक बातचीत की। हमने आतंकवाद के खतरों और फरवरी 2025 के भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य में उल्लिखित आतंकवाद-विरोधी सहयोग पर अपने विचार साझा किए।
 



इस बैठक में दुनिया भर में बढ़ते आतंकवाद के खतरे और उससे निपटने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। क्वात्रा ने सोशल मीडिया मंच पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों पर अपने-अपने नजरिए साझा किए।

हालांकि पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख से भारत निराश है। पाकिस्तान पोषित आतंकवाद भारत की सुरक्षा के लिए गहरी चिंता का विषय है।  थिंक टैंक सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के इस हफ्ते जारी एक पॉलिसी पेपर में चेतावनी दी गई है कि जरूरी सेक्टर में लगातार सहयोग के बावजूद, अमेरिका और भारत के बीच संबंधों पर गहरा रणनीतिक अविश्वास छाया हुआ है।

रिपोर्ट, 'रिपेयरिंग द ब्रीच: गेटिंग अमेरिका-भारत टाईज बैक ऑन ट्रैक', में कहा गया है कि 2025 में शुरू हुआ तनाव पूरी तरह से कम नहीं हुआ है और इसे ठीक होने में समय लगेगा।

लिसा कर्टिस, कीर्ति मार्टिन और सितारा गुप्ता की लिखी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नई दिल्ली इस बात से निराश है कि वाशिंगटन द्वारा द रेजिस्टेंस फ्रंट को आतंकवादी समूह घोषित करने के बाद भी पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद पर अमेरिका का ध्यान काफी नहीं है।

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