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रिश्तों का रसायन

कुछ जानकार खुलकर कहते हैं कि भारत-अमेरिका में तल्खी कायम है। कुछ कहते हैं कि खटास खत्म हो गई है। अधिकांश सब कुछ ठीक होने को लेकर आशान्वित हैं। आमीन।

 सांकेतिक सांकेतिक / iStock photo

आज की तारीख में अमेरिका और भारत के रिश्ते कैसे हैं? यह वाकई बड़ा सवाल है लेकिन इसका 100 प्रतिशत सही उत्तर किसी के पास नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का दूसरा साल इस बड़े प्रश्न का जनक है। टैरिफ की मार और फिर ऑपरेशन सिंदूर के वार से उपजी सियासी परिस्थितियों ने दोनों देशों के रिश्तों का पूरा रसायन ही बदल दिया है। माहौल तभी से खटास भरा हो गया था जब अमेरिका ने भारत को 'सर्वाधिक टैरिफ पीड़ित' देशों की फेहरिस्त में शामिल कर दिया था। उसके बाद टैरिफ की दर कम-ज्यादा होती रही और उसी मुताबिक रिश्ते भी खट्टे-मीठे होने लगे या परिभाषित किए जाने लगे। फिर आतंकवाद पर प्रहार के रूप में भारत की पाकिस्तान पर सैन्य प्रतिक्रिया और उसके बाद अमेरिका की पाकिस्तान से 'दृष्यमान नजदीकियों' ने दोनों देशों (भारत-अमेरिका) के बीच अविश्वास और मलाल का ऐसा बीच बोया कि खटास कम नहीं ही हुई। 

अलबत्ता, भारत के साथ अमेरिका में भी द्विपक्षीय संबंधों को व्याख्यायित करने वाले दो प्रमुख धड़े बने हुए हैं। एक वर्ग के अनुसार भारत-अमेरिका संबंधों में अभूतपूर्व नजदीकियों के बाद आई खटास अब भी कायम है और अमेरिका की पाकिस्तान से निकटता इस तल्खी का सबसे बड़ा आधार है। भारत अपने पड़ोसी से अमेरिका कि निकटता को संभवत: पचा ही नहीं सकता। सियासी जमात के अलावा भारत का अवाम भी इस 'निकटता' से अंदर तक आहत है। एक वर्ग ऐसा भी है जो यह मानता है कि संबंधों में आई खटास खत्म हो गई है और दोनों देश पहले जैसी कदमताल कर रहे हैं। व्यापार समझौते उदाहरण के तौर पर गिनाए जाते हैं। बीच-बीच में ट्रंप भारत के पीएम मोदी की तारीफ और दोस्ती में कसीदे पढ़ देते हैं। जैसा कि उन्होंने कुछ दिन पहले फिर किया। लेकिन भारत पर 12.5 टैरिफ लगाने की बात भी कही। 

इस बीच अमेरिका में समय-समय पर होने वाले संवाद और साक्षात्कारों से भी दो ही तस्वीरें उभर रही हैं। व्हाइट हाउस और विदेश विभाग के पूर्व भारत विशेषज्ञ बसंत संघेरा का कहना है कि भारत-अमेरिका संबंध 'रणनीतिक स्थिरीकरण' के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन व्यापार और नागरिक परमाणु सहयोग पर हालिया प्रगति के बावजूद, रणनीतिक अविश्वास भी बना हुआ है। वहीं, पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक निशा देसाई बिस्वाल का मानना है कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2025 के कठिन दौर के बाद अपने संबंधों को स्थिर करने में सफलता प्राप्त कर ली है। कुछ जानकार खुलकर कहते हैं कि भारत-अमेरिका में तल्खी कायम है। कुछ कहते हैं कि खटास खत्म हो गई है। अधिकांश सब कुछ ठीक होने को लेकर आशान्वित हैं। आमीन।

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