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प्रवासी भारतीयों ने 'राजदूत संधू' को बताया अमेरिका-भारत संबंधों का मुख्य शिल्पी

संधू 2020 में अमेरिका के राजदूत बने। वह इस महीने के अंत में कार्यालय छोड़ देंगे। अपने 35 वर्ष लंबे करियर के बाद संधू सरकारी सेवा से निवृत्त हो जाएंगे। इन साढ़े तीन दशकों की सेवा के दौरान उन्हें विभिन्न क्षमताओं में अमेरिका में चार बार नियुक्ति दी गई।

संधू 2020 में अमेरिका के राजदूत बने। / Image : X@Taranjit Singh Sandhu

अमेरिका में भारत के राजदूत रहे तरनजीत सिंह संधू सेवानिवृत्त हो गये हैं। उनकी वर्चुअल 'विदाई' पर अमेरिका के भारतीय समुदाय ने 'राजदूत संधू' को दोनों देशों के संबंधों का मुख्य शिल्पी बताया। समुदाय ने वाशिंगटन डीसी में संधू के चार साल के कार्यकाल की अहमियत रेखांकित करते हुए सराहना की। 

संधू 2020 में अमेरिका के राजदूत बने। वह इस महीने के अंत में कार्यालय छोड़ देंगे। अपने 35 वर्ष लंबे करियर के बाद संधू सरकारी सेवा से निवृत्त हो जाएंगे। इन साढ़े तीन दशकों की सेवा के दौरान उन्हें विभिन्न क्षमताओं में अमेरिका में चार बार नियुक्ति दी गई। 

अपने हालिया कार्यकाल के दौरान राजदूत संधू ने भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा हुई। सिएटल में भारतीय वाणिज्य दूतावास की स्थापना की गई। महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (iCET) और जनरल इलेक्ट्रिक (GE) पर पहल जैसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए। एयरोस्पेस-हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) के लिए रास्ता बनाया। 

न्यूयॉर्क, अटलांटा, सैन फ्रांसिस्को, ह्यूस्टन और शिकागो के महावाणिज्यदूतों ने राजदूत संधू को सम्मानित करने और उनकी लंबी लेकिन महत्वपूर्ण सेवा के लिए भरपूर प्रशंसा दी। देश भर के प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों ने भी इस ऑनलाइन समारोह में भाग लिया। कुछ दिनों बाद वाशिंगटन डीसी के इंडिया हाउस में एक व्यक्तिगत विदाई भी आयोजित होने वाली है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CGI शिकागो सोमनाथ घोष ने प्रतिभागियों को राजदूत संधू के कार्यकाल के दौरान की उपलब्धियों की जानकारी दी और उनके योगदान तथा राजनयिक नेतृत्व की सराहना की। घोष ने कहा कि आपके काम के साथ ही समुदाय के नेता के रूप में और संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के प्रतिनिधि के रूप में आपकी उपस्थिति को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

AANHPI मामलों पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग के सदस्य अजय भुटोरिया ने भी राजदूत संधू की अनुकरणीय सेवा की तारीफ की। भुटोरिया ने कहा कि राजदूत संधू ...आप सिर्फ एक कुशल राजनयिक ही नहीं एक दूरदर्शी व्यक्ति हैं जिसने अमेरिका और भारत के बीच 21वीं सदी के द्विपक्षीय संबंधों के पथ को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया है। 

विशेष रूप से प्रवासी भारतीयों के लिए राजदूत की सेवाओं को 'अद्वितीय' बताते हुए डेट्रॉइट के धवल वैष्णव ने कहा कि आपने हमें एक भारतीय अमेरिकी के रूप में परिभाषित किया। आपने परिभाषित किया कि हम कौन हैं, हम कहां खड़े हैं ...और जब हम संयुक्त राज्य अमेरिका में घूमते हैं तो हम कह सकते हैं कि हमें वह सम्मान मिलता है जो एक भारतीय अमेरिकी के रूप में पहले हमें कभी नहीं मिलता था।

सिख अमेरिकी समुदाय में राजदूत के विशेष योगदान को रेखांकित करते हुए ग्रेटर ह्यूस्टन इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के संस्थापक सदस्य और सिख धर्म के साथी सदस्य जगदीप अहलूवालिया ने कहा कि आप सर्वश्रेष्ठ भारतीयों में से एक का खरा उदाहरण हैं। समुदाय के अन्य नेताओं ने भी राजदूत संधू की व्यक्तिगत और सामाजिक सेवाओं को उजागर किया। 

सभी के प्यार और समर्थन का धन्यवाद देते हुए राजदूत संधू ने प्रवासी भारतीयों की सराहना की और कहा कि भारतीय अमेरिकी समुदाय की उत्कृष्टता ने उन्हें और उनके कार्यालय को सभी क्षेत्रों में अमेरिका-भारत साझेदारी को और मजबूत करने का 'संकेत' दिया है। अपने संबोधन के दौरान निवर्तमान राजदूत ने उपस्थित लोगों को जानकारी दी कि भविष्य में संयुक्त राज्य अमेरिका में दो और भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने की योजना है। अंत में संधू ने भारतीय अमेरिकियों से आग्रह किया कि वे भारत में अपने मातृ संस्थानों और गृहनगरों के साथ लगातार जुड़े रहें और देश की विकास यात्रा में योगदान देते रहें। 

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