चीन का ‘रेयर अर्थ’ दबदबा / IANS File Photo
चीन अब अपनी रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) क्षमता को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ये तत्व पश्चिमी देशों की रक्षा प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं पर निर्भरता का लाभ उठाकर चीन को भू-राजनीतिक बढ़त दिला रहे हैं, एक लेख में कहा गया है।
लेख में बताया गया है कि ये 17 दुर्लभ पृथ्वी तत्व आधुनिक रक्षा प्रणालियों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके चुंबकीय, ऑप्टिकल और उत्प्रेरक गुणों का कोई विकल्प या कृत्रिम प्रतिस्थापन मौजूद नहीं। यह पश्चिमी देशों को इन महत्वपूर्ण रक्षा प्लेटफार्मों पर पूरी तरह निर्भर बनाता है।
मुख्य तत्व और उपयोग
नियोडिमियम और डाइसप्रोसियम: उच्च प्रदर्शन वाले स्थायी मैग्नेट के लिए, जो सटीक मार्गदर्शन वाले हथियारों में जरूरी हैं।
यूरोपीय और टर्बियम: नाइट विज़न सिस्टम और टारगेटिंग डिस्प्ले के लिए।
इट्रियम यौगिक: लेजर रेंजफाइंडर और संचार प्रणालियों में।
लेख में कहा गया है कि चीन ने दशकों की संगठित औद्योगिक नीति के तहत अपनी इस प्रभुत्व स्थिति को स्थापित किया। पर्यावरणीय लागतों को स्वीकार कर पश्चिमी देशों की तुलना में सस्ती प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान कीं, और राज्य सब्सिडी के माध्यम से प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर किया।
चीन की रणनीति सप्लाई चेन के हर स्तर पर नियंत्रण और अनिश्चितता पैदा करती है। लाइसेंसिंग प्रणाली में पेपरवर्क के जरिए लंबी देरी होती है, जिससे व्यापार संबंध बनाए रहते हैं लेकिन दीर्घकालीन निवेश और प्रतिस्पर्धी उत्पादन को हतोत्साहित किया जाता है।
साथ ही, इस प्रक्रिया में जानकारी का फायदा भी उठाया जाता है। निर्यात लाइसेंस आवेदन में अंतिम उपयोग का विस्तृत विवरण मांगा जाता है, जिससे चीन को पश्चिमी देशों की रक्षा परियोजनाओं, उत्पादन क्षमता और रणनीतिक प्राथमिकताओं की जानकारी मिलती है।
लेख में निष्कर्ष निकाला गया है कि चीन का यह ‘रेयर अर्थ हथियार’ न केवल संसाधनों तक नियंत्रण देता है बल्कि वैश्विक सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्र में उसे रणनीतिक बढ़त भी प्रदान करता है।
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