प्रतीकात्मक तस्वीर / Abhisek Saha/IANS
अखिल भारतीय किसान संघों का महासंघ (एफएआईएफए) ने सरकार से तंबाकू उत्पादों पर लगाए गए भारी टैक्स वापस लेने और उनमें सुधार की अपील की है। एफएआईएफए का कहना है कि टैक्स को ऐसा रखा जाए, जिससे सरकार की आय पर असर न पड़े और तस्करी (अवैध बिक्री) भी न बढ़े, साथ ही किसानों को नुकसान न हो।
एफएआईएफए ने शुक्रवार को एक बयान में कहा है कि अगर कर नीति स्थिर और संतुलित रहेगी, तो इससे किसानों की आमदनी बनी रहेगी, रोजगार सुरक्षित रहेगा और लंबे समय में लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े लक्ष्य भी पूरे किए जा सकेंगे।
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर तंबाकू से जुड़े कुछ उत्पादों पर 1 फरवरी से नया उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) लगाया है। इसके तहत सिगरेट की लंबाई के हिसाब से 1,000 सिगरेट पर 2,050 रुपए से 8,500 रुपए तक टैक्स लगेगा।
एफएआईएफए का कहना है कि इतने ज्यादा टैक्स से कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमत बढ़ानी पड़ेगी। इससे बिक्री घटेगी और अंत में किसानों से तंबाकू की खरीद कम हो जाएगी। इससे बाजार में तंबाकू ज्यादा होगा और किसानों को नुकसान हो सकता है।
एफएआईएफए के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा कि सरकार ने जीएसटी 2.0 की घोषणा करते समय भरोसा दिया था कि तंबाकू पर कुल टैक्स पहले जैसा ही रहेगा और जीएसटी खुदरा कीमत के 40 प्रतिशत पर ही लगेगा।
उन्होंने बताया कि किसानों ने सरकार के इस भरोसे पर विश्वास किया था और जीएसटी के नियमों में बदलाव का स्वागत भी किया था, क्योंकि इससे कुछ चीजों की कीमतें कम हुई थीं।
सरकार से अपील करते हुए एफएआईएफए के लीडर्स ने कहा कि भारत में कानून के हिसाब से सिगरेट पहले ही काफी महंगी हैं, खासकर लोगों की आमदनी के हिसाब से। यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में भी सामने आई है।
अगर टैक्स और बढ़ाया गया, तो लोग सही उत्पाद छोड़कर अवैध सामान खरीदने लगेंगे। इससे न तो सरकार को टैक्स मिलेगा और न ही किसानों को फायदा होगा।
एफएआईएफए ने सरकार से अपील की कि टैक्स नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे कानून मानने वाले किसानों और उद्योगों को सजा न मिले।
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