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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बाजार में बहार, विदेशी निवेश की वापसी के संकेत

अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क (रिसिप्रोकल टैरिफ) में कटौती से भारत के बाहरी खातों पर दबाव कम होगा और विकास की संभावनाएं मजबूत होंगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर / IANS

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर वैश्विक और घरेलू ब्रोकरेज हाउसेज़ ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था, कॉरपोरेट कमाई और विदेशी निवेश धारणा के लिए बड़ा सहारा साबित होगा। इसी भरोसे का असर शेयर बाजार में भी दिखा, जहां सेंसेक्स इंट्रा-डे कारोबार में 4,200 अंकों से ज्यादा उछलकर 85,871.73 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।

ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क (रिसिप्रोकल टैरिफ) में कटौती से भारत के बाहरी खातों पर दबाव कम होगा और विकास की संभावनाएं मजबूत होंगी।

गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि कम टैरिफ के चलते 2026 में भारत का चालू खाता घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट) जीडीपी के करीब 0.25 प्रतिशत तक घट सकता है और यह लगभग 0.8 प्रतिशत पर आ सकता है। ब्रोकरेज का मानना है कि समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद पूंजी प्रवाह में सुधार होगा, जिससे रुपये को समर्थन मिलेगा और डॉलर-रुपया अनुमान पर नीचे की ओर जोखिम कम होंगे।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब ब्याज दरों में कटौती चक्र के अंत के करीब है और 2026 तक रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रह सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह ट्रेड डील एशिया के अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारत को निर्यात प्रतिस्पर्धा के मामले में बेहतर स्थिति में लाती है।

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बर्नस्टीन ने कहा कि भारत को लेकर निवेशकों की धारणा में सुधार हो रहा है और हाल के महीनों में कॉरपोरेट आय कमजोर रहने के बावजूद यह बाजार में निवेश के लिए अच्छा समय हो सकता है।

नोमुरा ने विदेशी निवेश की वापसी की संभावना जताई है। ब्रोकरेज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में कमजोर प्रदर्शन के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। नोमुरा ने वित्त वर्ष 2027 में करीब 7 अरब डॉलर के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) अधिशेष का अनुमान लगाया है। साथ ही कहा कि टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से कपड़ा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों पर मार्जिन का दबाव कम होगा।

बीओएफए सिक्योरिटीज ने कहा कि भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलने से तकनीकी आयात बढ़ सकता है और दीर्घकालिक अमेरिकी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। ब्रोकरेज के अनुसार, रुपये में कुछ कमजोरी के बावजूद नई टैरिफ संरचना का कुल प्रभाव सीमित रहेगा। उसके अनुमान के मुताबिक, स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल जैसे उत्पादों पर मौजूदा अमेरिकी शुल्क को जोड़ने के बाद भारत की प्रभावी टैरिफ दर घटकर करीब 12–13 प्रतिशत रह सकती है, जो पहले 30–35 प्रतिशत के आसपास थी।

घरेलू ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि अब बाजार का फोकस कॉरपोरेट आय में सुधार के रुझान पर रहेगा। वहीं, एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने इस समझौते को भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद सकारात्मक बताया है। ब्रोकरेज के अनुसार, सबसे बड़ा फायदा विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी होगी, जो पिछले एक साल से बाजार की बड़ी चिंता बनी हुई थी।

इसी सकारात्मक परिदृश्य के आधार पर एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने मार्च 2027 तक निफ्टी 50 के लिए 29,500 का लक्ष्य तय किया है और वित्तीय सेवाओं, कैपिटल गुड्स, डिफेंस और उपभोक्ता-केंद्रित शेयरों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

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