अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा / X/@AmbVMKwatra
अमेरिका में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि योग अमेरिकी समाज में इतना घुल-मिल गया है कि 'लगभग हर गली' में एक योग स्टूडियो मिल सकता है। उन्होंने इसे हमारी सभ्यता की विरासत का एक बड़ा खज़ाना बताते हुए इसकी बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के देशव्यापी समारोह से पहले क्वात्रा ने IANS को बताया कि अगर आप वॉशिंगटन डीसी या अमेरिका में कहीं भी घूमें, तो लगभग हर गली में योग स्टूडियो दिखना बहुत आम बात है।
वॉशिंगटन के लिंकन मेमोरियल से लेकर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और शिकागो के नेवी पियर तक, अमेरिका भर में भारतीय राजनयिक मिशन 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) थीम के तहत बड़े पैमाने पर सार्वजनिक कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में शारीरिक गतिशीलता, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में योग की भूमिका को उजागर किया जाएगा।
वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास 19 जून को लिंकन मेमोरियल में अपना मुख्य समारोह आयोजित करेगा। लोगों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हुए दूतावास ने कहा: साल के सबसे बड़े योग सत्र के लिए हमारे साथ जुड़ें!
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क्वात्रा ने कहा कि यह वार्षिक आयोजन एक प्राचीन भारतीय परंपरा की दुनिया भर में स्वीकार्यता को दर्शाता है, जो अपनी उत्पत्ति के स्थान से बहुत आगे तक फैल चुकी है।संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में एक प्रस्ताव के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का फ़ैसला किया और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। यह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अनोखी पहल थी, जिसे 175 देशों का समर्थन मिला और उन्होंने इस प्रस्ताव को पारित करने में सहयोग किया।
योग को दुनिया के लिए भारत के स्थायी योगदानों में से एक बताते हुए राजदूत ने कहा कि योग सिर्फ भारत की प्राचीन परंपराओं में से एक नहीं है। यह हमारी सभ्यता की विरासत का एक बड़ा खज़ाना भी है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद कहा है कि योग हमारी प्राचीन परंपरा की एक अमूल्य देन है। क्वात्रा के अनुसार, योग की स्थायी लोकप्रियता मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने की इसकी क्षमता में निहित है। यह एक विरासत है। यह एक ऐसी परंपरा है जिसमें आपके शरीर, मन और विचारों का आपस में और इन तीनों का आपकी आत्मा के साथ एक बहुत ही सामंजस्यपूर्ण मेल कराने की अनोखी क्षमता है।
उन्होंने कहा कि इसी गहरे जुड़ाव की वजह से दुनिया भर में योग के चाहने वालों की संख्या बढ़ रही है। क्वात्रा ने कहा कि शायद इसी वजह से यह इंसान के मन की गहराइयों से जुड़ता है और इसी जुड़ाव के कारण योग सीमाओं से परे है। इसे सभी संस्कृतियों और मान्यताओं के लोग अपनाते हैं और बड़े पैमाने पर इसका अभ्यास करते हैं।
इस साल के आयोजन को ग्लोबल थीम से जोड़ते हुए उन्होंने कहा ति इस साल के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' (Yoga for Healthy Aging) है। यह स्पष्ट रूप से योग को ऊर्जा, सहनशक्ति और समग्र अच्छे स्वास्थ्य के रास्ते के तौर पर पहचानता है।
इस साल के समारोह का एक मुख्य आकर्षण पद्म श्री एच.आर. नागेंद्र की भागीदारी होगी। बेंगलुरु के रहने वाले योग विद्वान नागेंद्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग गुरु के तौर पर जाना जाता है।
नागेंद्र न्यूयॉर्क में योग दिवस के मुख्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और उनका नेतृत्व करेंगे। इनमें 21 जून को टाइम्स स्क्वायर में होने वाला कार्यक्रम भी शामिल है, जो दुनिया भर में योग दिवस के सबसे चर्चित कार्यक्रमों में से एक बन गया है।
न्यूयॉर्क में भारत का वाणिज्य दूतावास सालाना "माइंड ओवर मैडनेस योग" कार्यक्रम के लिए टाइम्स स्क्वायर एलायंस के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस सेशन का नेतृत्व 'आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन' की रुचिका लाल करेंगी, जबकि नागेंद्र मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर, 2014 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की थी। भारत ने इसके लिए एक प्रस्ताव पेश किया था जिसे रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों का समर्थन मिला था। 21 जून की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि यह 'समर सोल्स्टिस' (ग्रीष्म संक्रांति) का दिन होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन होता है।
2015 में पहली बार मनाए जाने के बाद से, योग दिवस भारत की सबसे सफल ग्लोबल सांस्कृतिक पहलों में से एक बन गया है। अब दुनिया भर में सरकारों, कम्युनिटी ग्रुप्स, स्कूलों, यूनिवर्सिटीज और वेलनेस संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हर साल लाखों लोग हिस्सा लेते हैं। इससे योग देश की 'सॉफ्ट पावर' और सभ्यतागत पहुंच की सबसे प्रमुख पहचान बन गया है।
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