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भारतीय-अमेरिकियों को भारत में सिर्फ 15-20% निवेश क्यों करना चाहिए? सौरभ मुखर्जी ने बताई चौंकाने वाली वजह

प्रवासी भारतीयों के निवेश संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका में रहने वाले निवेशकों को भारत में अत्यधिक निवेश करने से बचना चाहिए भले ही भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत हों।

 सौरभ मुखर्जी  सौरभ मुखर्जी / LinkedIn

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी सौरभ मुखर्जी ने भारतीय-अमेरिकी निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपने निवेश पोर्टफोलियो का केवल 15% से 20% हिस्सा ही भारत में रखें। उन्होंने यह बात 7 जून को सिएटल में आयोजित एक चर्चा कार्यक्रम के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था, एआई और विनिर्माण क्षेत्र की संभावनाओं पर बोलते हुए कही।

मुखर्जी ने रेमिटली मुख्यालय में आयोजित उद्घाटन प्रोज एंड काउंस कन्वर्सेशन्स कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन रेमिटली के वरिष्ठ उत्पाद प्रबंधक और प्रोज एंड काउंस के सह-संस्थापक कुशल शाह ने किया। इसमें सिएटल के भारतीय-अमेरिकी तकनीक, वित्त और उद्यमिता समुदाय के लगभग 45 लोग शामिल हुए।

प्रवासी भारतीयों के निवेश संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका में रहने वाले निवेशकों को भारत में अत्यधिक निवेश करने से बचना चाहिए भले ही भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत हों। उन्होंने कहा कि एक सामान्य समृद्ध एनआरआई के लिए मुझे यह तर्क समझ नहीं आता कि वह अपने पोर्टफोलियो का 15 से 20 प्रतिशत से अधिक भारत में क्यों रखे क्योंकि आप ऐसे बाजार में रह रहे हैं जो आपको कहीं अधिक अवसर देता है।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी बाजार का 10 वर्षीय रिटर्न 15 प्रतिशत है जबकि भारत का 10 वर्षीय रिटर्न डॉलर के हिसाब से 8 प्रतिशत है। मुखर्जी ने यह भी कहा कि गिफ्ट सिटी प्रवासी भारतीयों के लिए भारत में निवेश को आसान बना सकती है। आप सिएटल में अपने घर में बैठे-बैठे गिफ्ट सिटी में एक पीएमएस खाता खोल सकते हैं। आप डॉलर में निवेश कर सकते हैं, वहां कोई कर नहीं देना होगा और आपको केवल अमेरिका में अपना कर रिटर्न दाखिल करना होगा। यह एक अद्भुत व्यवस्था है।

उन्होंने गिफ्ट सिटी के बारे में बताते हुए कहा कि अहमदाबाद के पास स्थित गिफ्ट सिटी एक डॉलर-आधारित क्षेत्राधिकार है। वहां सब कुछ अमेरिकी डॉलर में होता है। वहां की बैंकिंग व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित है। आपको भारत में पूंजीगत लाभ कर नहीं देना पड़ेगा। वहां से आप दुनिया भर में निवेश कर सकते हैं।

चर्चा के दौरान भारत की आर्थिक संभावनाओं और भारतीय तकनीकी क्षेत्र पर एआई के प्रभाव पर भी बात हुई। मुखर्जी का मानना है कि भारत अब एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है और विनिर्माण क्षेत्र आर्थिक विकास में बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार भारत में बड़ा विनिर्माण उछाल आने वाला है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 50 वर्षों में हर प्रधानमंत्री विनिर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करना चाहता था लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। अगले 2, 3 या 4 साल में जैसे-जैसे मुद्रा का अधिक मूल्यांकन कम होगा, विनिर्माण निर्यात तेजी से बढ़ेगा। मुखर्जी ने कहा कि यह बदलाव पहले से ही कोयंबटूर, होसुर, गुजरात के कुछ हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और लुधियाना जैसे क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई छोटे शहरों के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। एआई ने उन परियोजनाओं के आकार को कम कर दिया है जिन्हें व्यावसायिक रूप से लाभदायक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि एक अच्छा कोडर या सिस्टम आर्किटेक्ट 50,000 डॉलर की छोटी परियोजना ले सकता है और उसे 2-3 दिनों में किसी छोटे या मध्यम उद्यम ग्राहक को सौंप सकता है। इसलिए बहुत से युवा सोच रहे हैं कि वे मुंबई या बेंगलुरु के ट्रैफिक से क्यों जूझें। वे अपने गृह नगर में रहकर दुनिया भर के लिए काम कर सकते हैं, पैसा कमा सकते हैं और चाहें तो अपना छोटा व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं। भविष्य इसी दिशा में जाएगा।

आपको बता दें कि कार्यक्रम की शुरुआत सिएटल में भारत के उप महावाणिज्यदूत सौमिथ राजू और रेमिटली के मुख्य व्यवसाय अधिकारी पंकज शर्मा के संबोधन से हुई। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया जिसमें विदेशी संस्थागत निवेश, भारत की प्रजनन दर और जनसंख्या रुझान चीन के मुकाबले भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा तथा प्रवासी भारतीयों की निवेश रणनीतियों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के समापन पर मुखर्जी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आप भारत को समझते हैं और यह महसूस करते हैं कि यह प्रतिभाशाली और मेहनती लोगों का देश है, जो हर चुनौती को पार कर सकते हैं, तो भारत आपको पुरस्कृत करता है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर माइक्रोसॉफ्ट इंडिया सूचीबद्ध कंपनी होती तो वह भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी होती। हम पहले से ही वैश्विक मुख्यधारा का हिस्सा हैं।

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