विदेश सचिव विक्रम मिस्री / YouTube/Ministry of External Affairs
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने बेबी अरिहा शाह का मुद्दा उठाया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। आइए जानते हैं कि बेबी अरिहा शाह का मुद्दा क्या है, जिसका जिक्र पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने किया।
बेबी अरिहा जर्मन फॉस्टर केयर में पल रही भारतीय बच्ची है। जर्मन चांसलर के भारत दौरे को लेकर एक खास ब्रीफिंग में मिसरी ने कहा कि भारत बेबी अरिहा के मामले में जर्मन सरकार के साथ फॉलो-अप करता रहेगा और हर कदम पर परिवार के संपर्क में रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि बेबी अरिहा की परवरिश जितना हो सके भारतीय माहौल में हो, जैसे भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करना और भारतीय त्योहार मनाना।
अरिहा शाह केस को लेकर उन्होंने कहा, "हम काफी समय से जर्मन सरकार, सभी जर्मन अधिकारियों, दिल्ली में उनके दूतावास, बर्लिन में जर्मन सरकार और सभी शामिल एजेंसियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह केस एक समय पर कानूनी मामला था, लेकिन हमारा मानना है कि आखिर में, इसमें शामिल मानवीय मुद्दों को ध्यान में रखकर ही निपटा जाना चाहिए।"
विक्रम मिस्री ने आगे कहा, "मैं यह नहीं कह सकता कि हम परिवार की परेशानी और मुश्किलों को समझते हैं क्योंकि सिर्फ वही लोग उन्हें समझ सकते हैं। हम स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं, और हम हर मुमकिन तरीके से उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि बेबी अरिहा की परवरिश ज्यादा से ज्यादा भारतीय माहौल में हो, चाहे वह भारतीय लोगों से मिलना-जुलना हो या जर्मनी में मनाए जा रहे भारतीय त्योहारों में हिस्सा लेना हो। हम उसके लिए हिंदी सीखने का इंतजाम करना चाहेंगे।"
उन्होंने कहा, "हाल ही में, हमने दूसरी चीजों के लिए भी कोशिशें कीं। मैं अभी इसके बारे में डिटेल में नहीं जाना चाहता। लेकिन, मैं आप सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम इस मुद्दे पर जर्मन सरकार के साथ हर स्टेज पर प्रतिबद्ध हैं, और पीएम मोदी ने भी चांसलर से इस बारे में बात की। इसलिए, हम इस मुद्दे पर जर्मन सरकार के साथ फॉलो-अप करते रहेंगे, और हम हर कदम पर परिवार के साथ रहेंगे।"
भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि हम इस मुद्दे को वैसे ही प्राथमिकता दे रहे हैं जैसे हम भारत-जर्मनी संबंधों से जुड़े दूसरे मुद्दों को देते हैं। मेरे यूरोप के अतिरिक्त सचिव, जो मेरे साथ बैठे हैं, परिवार से अक्सर बात करते हैं। जब भी परिवार यहां आता है, वह उनसे मिलते हैं। हम हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं, और हम आपको समय-समय पर इस बारे में अपडेट देते रहेंगे।
बता दें, अरिहा शाह को 23 सितंबर, 2021 को जर्मनी के यूथ वेलफेयर ऑफिस (जुगेंडम्ट) की कस्टडी में रखा गया था। उस समय अरिहा सात महीने की थी, जब एक्सीडेंटल चोट लग गई थी। तब से वह फॉस्टर केयर में है। भारत का कहना है कि बच्चे के लिए उसके भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक माहौल में रहना जरूरी है।
पिछले साल सितंबर में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि उन्होंने नई दिल्ली में जर्मन काउंटरपार्ट जोहान वाडेफुल के साथ मीटिंग के दौरान अरिहा शाह का मुद्दा उठाया था।
अरिहा के माता-पिता धरा शाह और भावेश शाह गुजरात के रहने वाले हैं, जो अच्छी नौकरी मिलने पर 2018 में जर्मनी चले गए थे। 2021 में अरिहा का जन्म हुआ, और जब वह 7 महीने की थी, तो उसकी नानी उसे अपनी गोद में खिला रही थी, जब बच्ची को चोट लग गई। चोट लगने पर बच्ची को अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने बच्ची की चोट को देखकर ‘यौन प्रताड़ना’ का संदेह जताया। अस्पताल ने तुरंत जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी ‘यूगेंडम्ट’ को सूचित कर दिया। इसके बाद यूगेंडम्ट ने बच्ची को माता-पिता से अलग कर अपनी कस्टडी में ले लिया और तब से अरिहा को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।
बच्ची को कस्टडी में लेने के बाद जर्मन पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और डीएनए टेस्ट समेत तमाम मेडिकल जांच में यह साबित हो गया कि बच्ची के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ था। फिर साल 2022 की शुरुआत में पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ क्रिमिनल केस बंद कर दिया। धरा और भावेश के निर्दोष साबित होने के बाद भी जर्मनी की ‘चाइल्ड लाइन सर्विस’ ने बच्ची को लौटाने से मना कर दिया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि भले ही यौन शोषण नहीं हुआ, लेकिन माता-पिता ने बच्ची के साथ ‘हिंसक व्यवहार’ किया या वे उसकी देखभाल करने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसी के आधार पर कोर्ट ने माता-पिता के ‘पैरेंटिंग राइट्स’ खत्म कर दिए और बच्ची को फोस्टर केयर यानी देखभाल केंद्र में डाल दिया।
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