आयोजन की झलक। / Handout
अमेरिका स्थित 'राम एंड मिथिलेश गुप्ता फाउंडेशन' ने 'URJAA ग्लोबल' के साथ मिलकर हाल ही में नई दिल्ली में 'इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS), हेरिटेज एंड AI कॉन्फ्रेंस 2026' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और स्कूल लीडर्स को एक साथ लाया गया ताकि यह देखा जा सके कि आधुनिक शिक्षा में भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है।
एरोसिटी के प्राइड प्लाजा में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस का विषय था- ज्ञान, विरासत और नवाचार का एक दिन। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए भारत की सभ्यतागत समझ को नई तकनीकों के साथ जोड़ना था। कॉन्फ्रेंस की शुरुआत राम गुप्ता, ज्योति लूथरा, अभिषेक सिंह और डॉ. धीरज मेहरोत्रा द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुई।
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अमेरिका के 'बोस्टन प्लेज' के पार्थ घोष ने एक वर्चुअल कीनोट भाषण दिया, जिसमें उन्होंने शिक्षा और नवाचार में वैश्विक सहयोग पर अपने विचार साझा किए। 'राम एंड मिथिलेश गुप्ता फाउंडेशन' के संस्थापक राम गुप्ता ने भावी पीढ़ियों को तैयार करने में मूल्य-आधारित शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के महत्व पर जोर दिया।
'URJAA ग्लोबल प्रिंसिपल्स एसोसिएशन' की अध्यक्ष ज्योति लूथरा ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और शैक्षिक नेतृत्व, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के संगठन के विजन को रेखांकित किया। कॉन्फ्रेंस में शैक्षिक पहलों को आगे बढ़ाने में URJAA बोर्ड के सदस्यों और 'राम एंड मिथिलेश गुप्ता फाउंडेशन' के योगदान को भी सराहा गया।
कार्यक्रम में डॉ. धीरज मेहरोत्रा, शिव खेरा, डॉ. अमित कुमार, डॉ. दिलीप नंदकेओल्यार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित वैज्ञानिक डॉ. विक गैफनी के मुख्य भाषण शामिल थे। उन्होंने शैक्षिक नेतृत्व, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा की।
कॉन्फ्रेंस का मुख्य आकर्षण दो पैनल चर्चाएं थीं। पहली चर्चा, "AI का उपयोग करके स्कूली शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली को शामिल करना," इस बात पर केंद्रित थी कि AI कैसे कक्षाओं में पारंपरिक भारतीय शिक्षण प्रणालियों को शामिल करने में मदद कर सकता है। दूसरी चर्चा, "AI के युग में प्राचीन भारतीय ज्ञान," ने इस बात पर गौर किया कि कैसे भारतीय दर्शन और नैतिक परंपराएं तकनीक-आधारित शिक्षा की पूरक बन सकती हैं ताकि सीखने का एक अधिक समग्र माहौल बनाया जा सके।
कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने के लिए कथकली प्रदर्शन और लाइव संगीत प्रस्तुतियां भी हुईं। इनसे कॉन्फ्रेंस के इस संदेश को बल मिला कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण भी जरूरी है। कॉन्फ्रेंस का समापन शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए आयोजित पुरस्कार समारोह के साथ हुआ, जिसके बाद प्रतिभागियों के लिए नेटवर्किंग सेशन रखा गया।
आयोजकों ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस का मकसद एक ऐसा मंच तैयार करना था जहां शिक्षक, इनोवेटर और विचारक आपस में बातचीत कर सकें। इस बातचीत का केंद्र यह था कि देश की सांस्कृतिक और नैतिक नींव को बनाए रखते हुए भारत की ज्ञान परंपराओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ कैसे जोड़ा जाए।
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