मार्को रुबियो / Julia Demaree Nikhinson/Pool via REUTERS
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने भारत की ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का समर्थन करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में गहरा सहयोग दोनों देशों की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर सकता है।
व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को समर्थन करने के लिए अच्छी स्थिति में है, क्योंकि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा कर रहे हैं।
रुबियो ने कहा, "मुझे लगता है कि जाहिर है भारत बहुत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोत को अलग-अलग (डायवर्सिफाई) करने पर फोकस कर रहा है और इसलिए यह ट्रेंड जारी रहेगा और हम निश्चित रूप से इसका हिस्सा बनना चाहेंगे। हमें लगता है कि हमारे पास इस बारे में कुछ समाधान हैं।"
रुबियो ने इस मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की कोशिशों से जोड़ा। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने मिडिल ईस्ट में शांति को मौका इसलिए दिया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि हमारे सहयोगी देशों के लिए मार्केट में ज्यादा फ्यूल आए।"
रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा अलग-अलग तरह के सप्लाई बेस को बनाए रखने पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि लंबे समय का समाधान असल में उनकी सप्लाई में विविधता लाना है।"
अमेरिकी विदेश सचिव ने भारत के लिए भविष्य में कच्चे तेल के संभावित सोर्स के तौर पर वेनेजुएला की ओर भी इशारा किया और कहा कि अमेरिका, वेनेजुएला की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
रुबियो ने कहा, "मुझे पता है कि भारत न सिर्फ अमेरिका, बल्कि वेनेजुएला से भी बात कर रहा है। हम उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत करीब से काम कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि भारत की रिफाइनिंग कैपेबिलिटी ने उसे वेनेज़ुएला के क्रूड को प्रोसेस करने के लिए खास जगह दी है। भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक है जिनके पास वेनेजुएला के हेवी क्रूड को रिफाइन करने की क्षमता है। इसलिए हम इसे भी आसान बनाने की कोशिश करेंगे।
रुबियो ने कहा कि ऊर्जा उन कई क्षेत्रों में से एक है जहां वाशिंगटन और नई दिल्ली के कॉमन स्ट्रेटजिक इंटरेस्ट हैं।
उन्होंने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा और अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है। मुझे लगता है कि हमारे बीच बहुत सी समानताएं हैं और हम मिलकर कई क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।"
रुबियो ने अर्थव्यवस्था, आपूर्ति शृंखला, महत्त्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को ऐसे क्षेत्र बताया, जिनमें दोनों देश सहयोग को लगातार गहरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "ये सभी ऐसे मुद्दे हैं जो हमें एक साथ जोड़ते हैं। हम कई विषयों पर एकजुट हैं।"
रुबियो ने संबंध में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को भी रेखांकित किया और कहा, "आपके पास एक बहुत मजबूत भारतीय अमेरिकी समुदाय भी है, जो हमारे देशों के बीच एक अतिरिक्त जुड़ाव का जरिया है।"
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उसने लगातार अपने कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के आयात को बढ़ाया है। ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाना, किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने की नई दिल्ली की रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है।
ऊर्जा सहयोग भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का एक जरूरी स्तंभ बनकर उभरा है। तेल और एलएनजी में बढ़ते व्यापार के साथ-साथ, दोनों देशों ने अपने बड़े आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव के हिस्से के तौर पर सिविल परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, जरूरी मिनरल और मजबूत सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाया है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login