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चीन को घेरने में अंडमान भारत का बड़ा हथियार: US विशेषज्ञ

रिटेज फ़ाउंडेशन के विशेषज्ञ जेफ स्मिथ ने कहा कि अंडमान-निकोबार द्वीप “किसी भी देश के लिए बहुत मूल्यवान संपत्ति” हैं।

 पोर्ट ब्लेयर पोर्ट ब्लेयर / IANS/DPRO

अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की विदेश मामलों की समिति के साउथ और सेंट्रल एशिया सबकमेटी में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप भारत–अमेरिका की समुद्री साझेदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण सामरिक संपत्ति बनते जा रहे हैं। ये द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित हैं, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है।

10 दिसंबर को हुई सुनवाई में हेरिटेज फ़ाउंडेशन के विशेषज्ञ जेफ स्मिथ ने कहा कि अंडमान-निकोबार द्वीप “किसी भी देश के लिए बहुत मूल्यवान संपत्ति” हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से भारत को समुद्री गतिविधियों को देखने-समझने की विशेष क्षमता मिलती है, जो इंडो-पैसिफिक में बेहद अहम है।

उन्होंने अमेरिकी सांसदों से कहा, “मैं चाहता हूं कि अमेरिका और भारत इस जगह पर और अधिक सहयोग करें—खासकर खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री निगरानी को बढ़ाने में।”

यह भी पढ़ें- ऑस्ट्रेलिया का UNSW करेगा भारत में पहला विदेशी कैंपस लॉन्च, बेंगलुरु से शुरुआत

चीन की गतिविधियों पर चिंता
जेफ स्मिथ ने बताया कि चीन ने 2013-14 के आसपास हिंद महासागर में पनडुब्बियां भेजना शुरू किया, और चीन का दावा कि ये “एंटी-पाइरेसी मिशन” थे, बिल्कुल अविश्वसनीय है।
उन्होंने कहा, “सोमालिया के तट पर समुद्री लुटेरों को रोकने के लिए परमाणु पनडुब्बी की जरूरत नहीं पड़ती—यह बात सभी जानते हैं।” स्मिथ के अनुसार, चीन के साथ सीमा विवाद, हिंद महासागर में चीन की समुद्री घेराबंदी रणनीति, पाकिस्तान के साथ चीन की मजबूत साझेदारी और इन सबने भारत को “चारों ओर से घिरा हुआ” महसूस कराया है।

अंडमान बनाम चीन: इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
स्मिथ ने बताया कि अमेरिका की डिएगो गार्सिया में मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत के पास अंडमान-निकोबार में नौसैनिक बेस है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के बिल्कुल पास है। उन्होंने कहा कि इससे भारत और अमेरिका दोनों को “पश्चिमी प्रशांत से हिंद महासागर में आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी करने में मदद मिलती है।”

भारत का नौसैनिक विस्तार
भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञ ध्रुव जयशंकर ने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में नौसैनिक गश्ती बढ़ाई है, मानवीय मदद और एंटी-पाइरेसी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है और पश्चिमी प्रशांत में दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, पापुआ न्यू गिनी और गुआम जैसे देशों के साथ अभ्यास मजबूत किए हैं।

अमेरिकी सांसदों की चेतावनी
सुनवाई के चेयरमैन बिल ह्यूज़ेंगा ने कहा कि चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति हिंद महासागर को घेरने और नियंत्रित करने का सीधा प्रयास है। उन्होंने कहा कि मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं।

अमेरिका की मांग: भारत के साथ गहरा सैन्य तालमेल
जेफ स्मिथ ने अमेरिकी कांग्रेस से कहा कि रक्षा उत्पादन साझेदारी तेज की जाए, रक्षा निर्यात की मंजूरी प्रक्रिया आसान हो, खुफिया समझौते और मजबूत किए जाएं, ताकि दोनों देश चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर मिलकर नजर रख सकें।

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