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एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर फीस के खिलाफ अपील, अमेरिकी अदालत तुरंत सुनवाई को तैयार

यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स और व्हाइट हाउस की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

 एच-1बी वीजा  एच-1बी वीजा / REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने 5 जनवरी को उस अपील की त्वरित सुनवाई (एक्सपीडाइटेड हियरिंग) को मंजूरी दे दी, जिसमें अमेरिकी उद्योग और शोध संगठनों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नए एच-1बी वीजा पर लगाई गई 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की भारी फीस को चुनौती दी है। यह फीस उच्च-कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किए जाने वाले नए एच-1बी वीजा पर लागू की गई है।

अमेरिका के सबसे बड़े कारोबारी लॉबी संगठन, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अदालत में दलील दी थी कि मार्च में शुरू होने वाली सालाना एच-1बी वीजा लॉटरी से पहले इस मामले की त्वरित समीक्षा जरूरी है, ताकि नियोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें। ट्रम्प प्रशासन ने भी तेज सुनवाई के इस अनुरोध का विरोध नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने फरवरी में मौखिक बहस (ओरल आर्ग्युमेंट्स) कराने की समय-सीमा तय कर दी।

यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स और व्हाइट हाउस की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

अदालत में दाखिल दस्तावेजों में चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि एच-1बी कार्यक्रम के तहत अधिकतर अमेरिकी नियोक्ताओं के पास साल में सिर्फ एक ही मौका होता है, जब वे कुशल विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए वीजा आवेदन कर सकते हैं। चैंबर ने 2 जनवरी को दायर अपने कागजात में कहा, “इस साल एच-1बी कार्यक्रम में भाग लेने की नियोक्ताओं की क्षमता इस अपील के नतीजे पर निर्भर करती है। यदि मार्च तक राहत नहीं मिली, तो बहुत देर हो जाएगी।”

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दरअसल, चैंबर दिसंबर 24 के उस फैसले के खिलाफ अपील कर रहा है, जिसमें एक अमेरिकी जिला न्यायाधीश ने कहा था कि नई फीस राष्ट्रपति के आव्रजन को नियंत्रित करने के व्यापक अधिकारों के दायरे में आती है।

सितंबर में ट्रम्प द्वारा 1 लाख डॉलर की नई फीस लगाए जाने से पहले, एच-1बी वीजा पर आमतौर पर 2,000 से 5,000 डॉलर तक की फीस लगती थी, जो अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करती थी।

एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियों को विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षित विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति मिलती है। खास तौर पर टेक्नोलॉजी कंपनियां इस वीजा पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं। इस कार्यक्रम के तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि उन्नत डिग्री (एडवांस्ड डिग्री) धारकों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा होते हैं। ये वीजा आमतौर पर 3 से 6 साल की अवधि के लिए मंजूर किए जाते हैं।

इसी बीच, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक अलग नियम जारी किया है, जिसके तहत अब लॉटरी की रैंडम चयन प्रक्रिया की जगह नया आवंटन सिस्टम लागू होगा। इस नए सिस्टम में अधिक कुशल और अधिक वेतन पाने वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह नियम 27 फरवरी से लागू होने वाला है।

ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि एच-1बी कार्यक्रम का दुरुपयोग हुआ है और कुछ अमेरिकी नियोक्ता कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखकर अमेरिकी श्रमिकों की जगह ले रहे हैं।

हालांकि, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अपने मुकदमे में दलील दी है कि इतनी अधिक फीस कंपनियों को या तो अपने श्रम खर्च में भारी बढ़ोतरी करने पर मजबूर करेगी या फिर उन्हें कम संख्या में उच्च-कुशल विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना पड़ेगा।

इस फीस को चुनौती देने के लिए डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले कई अमेरिकी राज्यों के समूह, साथ ही नियोक्ताओं, गैर-लाभकारी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं के गठबंधन ने भी अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं।

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