सांकेतिक / IANS
ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को एक नया अंतिम नियम जारी किया, जिसके तहत दशकों पुरानी उस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है जिसमें कई विदेशी छात्र और एक्सचेंज विजिटर अमेरिका में बिना किसी तय अंतिम तारीख के रह सकते थे। अब उनकी एंट्री एक तय समय सीमा के लिए होगी और वीजा बढ़ाने के लिए उन्हें केंद्र सरकार की अनिवार्य जांच से गुजरना होगा।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने बताया कि नए नियम के तहत गैर-आप्रवासी वीजा की 'F', 'J' और 'I' श्रेणियों के लिए लागू 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब विदेशी छात्रों, मीडिया प्रतिनिधियों और एक्सचेंज विजिटर्स को उनके स्वीकृत कार्यक्रम की अवधि के अनुसार अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी, लेकिन यह अवधि अधिकतम चार साल तक ही होगी।
DHSस का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य इमिग्रेशन सिस्टम में 'सुधार लाना', वीजा के गलत इस्तेमाल को रोकना और नियमित सरकारी जांच के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। DHS सचिव मार्कवेन मुलिन ने कहा कि लगभग आधी सदी से चली आ रही 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था ने राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर किया और इमिग्रेशन धोखाधड़ी के लिए रास्ते खोले।
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उन्होंने कहा कि कई दशकों तक विदेशी छात्रों को अमेरिका में बिना तय समय सीमा के रहने की अनुमति मिलती रही, जिससे कुछ लोग बार-बार नए कोर्स में दाखिला लेकर अमेरिका में बने रहते थे और उन्हें देश छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती थी। इन वीजा के लिए साफ और तय समय सीमा लागू करके अमेरिका यह सुनिश्चित कर रहा है कि लोगों की सही तरीके से जांच हो, उनकी निगरानी की जा सके और वे अपने मुख्य उद्देश्य यानी पढ़ाई पूरी करने पर ध्यान दें और फिर अपने देश लौटें।
डीएचएस के अनुसार, 1978 से विदेशी छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए कोई तय अवधि नहीं दी जाती थी। इसकी वजह से कुछ लोग लगातार नए शैक्षणिक कार्यक्रमों में दाखिला लेकर लंबे समय तक अमेरिका में रह पाते थे। नए नियम के बाद यह व्यवस्था बदल जाएगी। अब रहने की अवधि तय होगी और वीजा बढ़ाने का अधिकार शैक्षणिक संस्थानों की जगह संघीय सरकार के पास होगा।
अगर किसी छात्र या एक्सचेंज विजिटर को अपना कार्यक्रम पूरा करने के लिए ज्यादा समय चाहिए, तो उसे सीधे अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के पास 'स्टे बढ़ाने' के लिए आवेदन करना होगा। DHS ने बताया कि इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक जांच, बैकग्राउंड चेक और धोखाधड़ी की जांच भी शामिल होगी।
इस नियम के तहत F-1 छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी होने, कॉलेज बदलने या स्टेटस बदलने के बाद अमेरिका छोड़ने की छूट की अवधि भी 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, पढ़ाई के कार्यक्रम बदलने पर भी पहले से ज्यादा सख्त नियम लागू होंगे। DHS ने बताया कि यह अंतिम नियम आने वाले दिनों में फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा और प्रकाशन के 60 दिन बाद लागू हो जाएगा।
जो विदेशी छात्र और अन्य गैर-आप्रवासी वीजा धारक पहले से अमेरिका में 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था के तहत रह रहे हैं, वे भी नई व्यवस्था में आ जाएंगे। उनका अधिकृत प्रवास नियम लागू होने की तारीख से अधिकतम चार साल तक सीमित होगा।
DHS का कहना है कि कई अन्य गैर-आप्रवासी वीजा पहले से ही तय अवधि के आधार पर चलते हैं। नया नियम छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया वीजा को भी इसी तरह की व्यवस्था में लाएगा।
अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के तहत चलने वाला स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) आगे भी स्कूलों और विदेशी छात्रों की निगरानी करता रहेगा। इसके लिए स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (SEVIS) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें अमेरिका की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े स्कूलों, एक्सचेंज कार्यक्रमों और विदेशी छात्रों की जानकारी दर्ज होती है।
यह नीति ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसमें इमिग्रेशन नियमों को और सख्त करने और अस्थायी वीजा कार्यक्रमों पर संघीय निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
भारत लंबे समय से अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के सबसे बड़े सोर्स में शामिल रहा है। नए नियम के बाद भारतीय छात्रों समेत सभी विदेशी छात्रों को वीजा बढ़ाने के लिए ज्यादा सरकारी जांच का सामना करना पड़ सकता है। जिन छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए होगा, उन्हें अब सीधे यूएससीआईएस से मंजूरी लेनी होगी।
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