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मसालों वाला क्रिसमस: कैसे भारतीय-अमेरिकी समुदाय त्योहार को दे रहे नया रंग

कई दशकों तक प्रवासी क्रिसमस की कहानी ‘जबरन ढलने’ की रही-मानो किसी और का त्योहार उधार लेकर मनाया जा रहा हो। लेकिन अब वक्त बदल चुका है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / unsplash

दिसंबर के आखिरी दिनों में अगर आप किसी इंडियन-अमेरिकन घर में कदम रखें, तो आपकी इंद्रियां पल भर के लिए उलझ सकती हैं। कोने में सजा डगलस फ़र का क्रिसमस ट्री है, जिस पर टिमटिमाती लाइटें लगी हैं, हो सकता है कि ये दीवाली की बची हुई सजावट ही हों। लेकिन पाइन की खुशबू के नीचे एक और जानी-पहचानी महक है-इलायची, लौंग और चूल्हे पर पकती बिरयानी की।

कई दशकों तक प्रवासी क्रिसमस की कहानी ‘जबरन ढलने’ की रही-मानो किसी और का त्योहार उधार लेकर मनाया जा रहा हो। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। इंडियन-अमेरिकन समुदाय सिर्फ इस त्योहार में शामिल नहीं हो रहा, बल्कि इसे अपने रंग में ढाल रहा है।

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लॉस एंजेलिस की वकील प्रथाना आर. कहती हैं, 'लंबे समय तक ऐसा लगता था जैसे हम किसी और का त्योहार मना रहे हैं-एक ऐसा स्वेटर पहनकर जो ठीक से फिट नहीं बैठता। फिर करीब पांच साल पहले मेरी मां ने फायरप्लेस के पास, स्टॉकिंग्स के बगल में, एक छोटा सा रंगोली बनाना शुरू किया। बस उसी छोटे से बदलाव ने सब कुछ बदल दिया। हमारा लिविंग रूम अब किसी दुकान के कैटलॉग जैसा नहीं, बल्कि हमारी पहचान जैसा लगने लगा।' आज उनके घर में क्रिसमस ट्री के नीचे कढ़ाई वाली सिल्क साड़ी बिछी होती है और सजावट में जयपुर से लाए गए छोटे हाथी और शीशे के हस्तशिल्प भी टंगे होते हैं।

 

लजीज भारतीय व्यंजन / image provided

हालांकि इस सांस्कृतिक मेल का असली दिल रसोई में धड़कता है। अमेरिकी क्रिसमस डिनर, जिसे अक्सर फीका माना जाता है, अब मसालों की जानदार खुशबू से भर रहा है। भुना हुआ टर्की भले ही मेज पर हो, लेकिन अब वह अकेला सितारा नहीं होता।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर ध्रुव के. बताते हैं, 'मेरे दोस्त टर्की या हैम पसंद करते हैं, लेकिन हर सर्दी में दिल्ली से मिलने आने वाले मेरे माता-पिता ‘उबला हुआ मांस’ कहकर उसे शालीनता से मना कर देते हैं। फिर एक खूबसूरत समझौता होता है। हम मसाला-मैरीनेटेड रोस्ट लैम्ब बनाते हैं, साथ में पारंपरिक स्टफिंग भी। ग्रेवी में हल्की सी गरम मसाला की खुशबू होती है। वह क्रिसमस जैसी भी लगती है और घर जैसी भी। आखिर हमें किसी एक को क्यों चुनना चाहिए?'

आज कुकी एक्सचेंज में गुलाब जामुन या गुलाब-फ्लेवर मैकरॉन्स शामिल हैं, और मिठाइयों में पंपकिन पाई के साथ गाजर का हलवा भी। मेहमान दोनों का भरपूर आनंद लेते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर / unsplash

कैलिफोर्निया के मिलपिटास की शिल्पी एम. मानती हैं कि यह मेल अगली पीढ़ी को जड़ों से जोड़े रखने के लिए जरूरी है। 'अगर मैं बच्चों को सिर्फ फ्रूटकेक दूं, तो वे खा लेंगे और भूल जाएंगे। लेकिन अगर मैं केसर और किशमिश वाली क्रिसमस खीर परोसूं, तो वह उन्हें हमेशा याद रहती है। इससे उनकी अमेरिकी जिंदगी की यादें भारतीय स्वाद से जुड़ जाती हैं। इसलिए हर दिसंबर हम घर आने वाले हर मेहमान को क्रिसमस खीर जरूर खिलाते हैं।'

क्रिसमस ट्री के चारों ओर रंगोली बनाकर और खाने में भारतीय मसालों का तड़का लगाकर, इंडियन-अमेरिकन समुदाय सिर्फ मजा नहीं कर रहा-वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अलग पहचान गढ़ रहा है। यह उन्हें सिखा रहा है कि गर्मजोशी और रोशनी के इस मौसम को मनाने के लिए खुद का कोई हिस्सा पीछे छोड़ना जरूरी नहीं। इस छुट्टियों के मौसम में, इंडियन-अमेरिकनों के लिए सबसे बड़ा तोहफ़ा यही है-पूरी तरह भारतीय भी होना और पूरी तरह अमेरिकी भी।

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