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तमिलों को एक सूत्र में पिरोने का मंच है GOTO, पहली बार तमिलनाडु के बाहर हुई कॉन्फ्रेंस

GOTO एक ग्लोबल नेटवर्क है जो तमिल भाषी लोगों को एकजुट करने और दुनिया भर में समृद्ध तमिल संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित करने के लिए प्रयासरत है।

 GOTO की 11वीं कॉन्फ्रेंस का पहली बार मलेशिया के पेनांग में आयोजन किया गया। GOTO की 11वीं कॉन्फ्रेंस का पहली बार मलेशिया के पेनांग में आयोजन किया गया। / Photo gotoorganisation.com

ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ तमिल ओरिजिन (GOTO) की 11वीं कॉन्फ्रेंस का पहली बार भारत के तमिलनाडु से बाहर आयोजन किया गया। मलेशिया के पेनांग में 4-5 जनवरी को आयोजित इस सम्मेलन में एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 

पेनांग के मुख्यमंत्री चाउ कोन येव ने पेनांग और तमिलनाडु के बीच दीर्घकालिक आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में सम्मेलन के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में सिंगापुर, भारत और मलेशिया से भी तमिल प्रवासी शामिल हुए।

इस दौरान तमिल प्रवासियों को एकजुट करने और भौगोलिक एवं वैचारिक दूरियां पाटने के उद्देश्य से व्यापार वार्ता, शैक्षिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चर्चा के विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। 

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण महिला लीडरशिप फोरम था। इस दौरान दुनिया भर की वुमन लीडर्स के योगदान को सराहा गया। उन्होंने अपने अनुभव, नेटवर्किंग स्किल्स और मेंटरशिप से मार्गदर्शन किया।

GOTO सम्मेलन का आयोजन पारंपरिक रूप से तमिलनाडु में किया जाता रहा है। लेकिन इस वर्ष इसे पेनांग में आयोजित किया गया जिसने मलेशियाई राज्य और तमिल समुदाय के बीच संबंधों का एक नया अध्याय शुरू किया। 

GOTO एक ग्लोबल नेटवर्क है जो तमिल भाषी लोगों को एकजुट करने और दुनिया भर में समृद्ध तमिल संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित करने के लिए प्रयासरत है। इसका उद्देश्य भारत समेत दुनिया भर में फैले तमिल प्रवासियों को एक सूत्र में पिरोना है।

तमिलनाडु में लगभग आठ करोड़ तमिल नागरिक हैं। पड़ोसी आंध्र, कर्नाटक, केरल और पांडिचेरी जैसे राज्यों में दो करोड़ तमिल रहते हैं। इसके अलावा मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, यूरोप, अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका, मॉरीशस और नॉर्वे जैसे देशों में 3.6 करोड़ तमिल प्रवासी निवास करते हैं। 

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