PM मोदी / Courtesy: IANS
नॉर्वे के प्रमुख बिजनेस दा-गन्स नैरीस्लिव (डीएन) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय राजनेता बताया है। साथ ही नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों को मशविरा दिया है कि उन्हें पीएम मोदी से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
18 मई को प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे की यात्रा पर जाएंगे।
भारत के प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किंग हैरल्ड करेंगे। वे भारतीय व्यापार को नहीं रफ्तार देंगे, भारतीय प्रवासी समुदाय से मिलेंगे और भारत-नॉर्डिक प्रधानमंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे।
नॉर्वे के इस समाचारपत्र ने लिखा, “नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों को ध्यान से सुनना चाहिए। उन्हें अपने भारतीय समकक्ष से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।”
18 मई को पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा से कुछ दिन पहले प्रकाशित लेख में कहा गया था कि, “जहां नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों की घरेलू लोकप्रियता मुश्किल से 30 प्रतिशत तक पहुंचती है, वहीं पीएम मोदी की लोकप्रियता लगभग 70 प्रतिशत है। किसी भी बड़े देश का नेता अपने देश में पीएम मोदी जितना लोकप्रिय नहीं है।”
लेख में कहा गया, “पीएम मोदी भारत में 12 वर्षों से अधिक समय से सत्ता में हैं। यदि वे फिर से चुनाव लड़ने का निर्णय लेते हैं, तो सभी संकेत बताते हैं कि वे दोबारा निर्वाचित होंगे। यह यूरोपीय नेताओं के लिए एक दूर की कौड़ी है। उनकी सफलता का श्रेय तेज आर्थिक विकास, प्रभावशाली विचारधारा, दुनिया की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी और उनकी व्यक्तिगत जीवन यात्रा को दिया जा सकता है।”
लेख में पीएम मोदी की साधारण पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि यह उस दुनिया में “लगभग अनोखी” है जहां अधिकांश राष्ट्राध्यक्ष उच्च मध्यम वर्ग से आते हैं।
लेख में कहा गया, “उन्हें अपने राजनीतिक करियर के लिए किसी का धन्यवाद नहीं करना है, सिवाय स्वयं के और हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन के। वे भारत के ईनार गेरहार्डसेन जैसे स्वशिक्षित और एक आयोजक हैं।”
आगे कहा गया कि पीएम मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाली एक मजबूत शक्ति हैं। भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो चीन से तेज है और अन्य सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से काफी आगे है। वर्तमान वृद्धि दर के अनुसार 2050 तक भारत की अर्थव्यवस्था चार गुना हो सकती है और तब भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर अमेरिका को चुनौती देगा।
लेख में हरित विकास (ग्रीन ग्रोथ) को बढ़ावा देने में पीएम मोदी की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि भारत अब दुनिया में सौर और पवन ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और यह आश्चर्य की बात नहीं होगी यदि वह अमेरिका को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर पहुंच जाए। पिछले वर्ष भारत में कोयला उत्सर्जन पहली बार घटा।
रिपोर्ट में कहा गया, “पश्चिमी नेता पीएम मोदी के लगातार दिए जाने वाले हरित संदेश से बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी शायद ही कभी वैश्विक जलवायु वार्ताओं या उत्सर्जन की बात करते हैं। वे किसी से पर्यावरण के लिए त्याग करने को नहीं कहते। उनका संदेश यह है कि भारत 1.5 अरब लोगों को हरित विकास के माध्यम से गरीबी से बाहर निकाल सकता है। अब अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच कोई विकल्प नहीं रह गया है।”
लेख में यह भी कहा गया कि यदि अगला चुनाव धर्मनिरपेक्ष दल जीत भी जाएं, तब भी भारत की विचारधारा हिंदू राष्ट्रवाद पर ही केंद्रित रहेगी।
इसमें कहा गया, “हिंदू राष्ट्रवाद उस प्रश्न का भारत का उत्तर है, जिसका सामना औद्योगिक क्रांति के बाद सभी गैर-पश्चिमी देशों ने किया—आधुनिक कैसे बनें, बिना पश्चिम जैसा बने? जापान पहला देश था जिसने इस समस्या का समाधान किया—अत्यधिक आधुनिक बनकर भी जापानी बना रहा। कोरिया अब जापान से अधिक समृद्ध है और अपनी संस्कृति तथा संगीत का बड़ा निर्यातक है। चीन अपनी आधुनिकता को कन्फ्यूशियसवाद, ताओवाद और बौद्ध धर्म जैसी अपनी जड़ों में स्थापित करता है।”
लेख में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताया गया है, जिसके 10 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। इसमें कहा गया कि पार्टी ने भारत में अभूतपूर्व तरीके से सभी जातियों, अमीरों और गरीबों का समर्थन हासिल किया है।
लेख के अनुसार, “पश्चिमी विश्लेषकों के बीच भाजपा की आलोचना करना एक तरह का शौक बन गया है। आलोचक यह कहने में सही हैं कि भाजपा हिंदुओं की एकता की बात करती है। लेकिन ऐसा बहुत कम प्रमाण है कि भाजपा शासन में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष बढ़े हों। कांग्रेस शासन के दौरान अधिक हिंसा और दंगे हुए थे। पड़ोसी देशों से लाखों मुसलमान भारत आ रहे हैं; बहुत कम मुसलमान भारत छोड़कर जा रहे हैं।”
लेख में यह भी कहा गया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने लोकतांत्रिक मॉडल को चुना है, क्योंकि लोकतंत्र भारतीय संस्कृति और परंपरा में गहराई से निहित है। इसका ब्रिटिश शासन से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि ब्रिटिश राज के अन्य पूर्व उपनिवेश जैसे पाकिस्तान, म्यांमार और खाड़ी राजतंत्र लोकतांत्रिक नहीं हैं।
अंत में लेख में कहा गया, “ऐसी दुनिया में जहां नॉर्वे को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए नए सहयोगियों की आवश्यकता है और नॉर्वे के व्यापार को नए अवसरों की जरूरत है, भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों से बहुत लाभ हो सकता है। लेकिन इसके लिए हमें केवल उपदेश देने के बजाय सुनने की भी इच्छा रखनी होगी। तब अनगिनत पारस्परिक लाभ के अवसर खुल सकते हैं।”
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