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भारत-पाक डीजीएमओ वार्ता में परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई: जनरल उपेंद्र द्विवेदी

उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत में परमाणु युद्ध से जुड़ा कोई भी मुद्दा चर्चा का हिस्सा नहीं था।

भारतीय जनरल उपेंद्र द्विवेदी / IANS

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच हुई बातचीत में परमाणु युद्ध से जुड़ा कोई भी मुद्दा चर्चा का हिस्सा नहीं था।

आर्मी डे (15 जनवरी) से पहले आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल द्विवेदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई के चलते पाकिस्तान में जो नुकसान हुआ, वह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पारंपरिक (कन्वेंशनल) सैन्य कार्रवाई के दायरे का विस्तार किया।

उन्होंने कहा, “जहां तक परमाणु बयानबाजी का सवाल है, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि डीजीएमओ वार्ता में परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पाकिस्तान में जो भी परमाणु बयानबाजी हुई, वह वहां के नेताओं या स्थानीय लोगों की ओर से थी। मुझे ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि यह बात वहां की सेना की ओर से आई हो।”

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सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि पहले यह माना जाता था कि पारंपरिक सैन्य कार्रवाई की गुंजाइश कम होती जा रही है और सीधे सब-कन्वेंशनल से परमाणु स्तर पर पहुंचा जा सकता है। लेकिन इस बार जम्मू-कश्मीर में हुई फायरिंग और उसके जवाब में भारत की कार्रवाई ने यह दिखा दिया कि कन्वेंशनल स्पेस को प्रभावी ढंग से बढ़ाया गया।

जनरल द्विवेदी ने बताया, “इन 88 घंटों में सेना की तैनाती और तैयारी ऐसी थी कि अगर पाकिस्तान ने कोई भी गलती की होती, तो हम ज़मीनी सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। इस दौरान हमने उनके करीब 100 जवानों को निष्क्रिय किया।”

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आठ आतंकी कैंप अब भी सक्रिय हैं, जिनमें से दो अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास और छह नियंत्रण रेखा (LoC) के पार स्थित हैं। सुरक्षा बल इन पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।

IANS के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “हमारे पास जानकारी है कि इन कैंपों में अभी भी किसी न किसी तरह की मौजूदगी या ट्रेनिंग चल रही है। यदि भविष्य में इसी तरह की कोई कार्रवाई होती है, तो हम उससे सख्ती से निपटेंगे।”

सेना प्रमुख ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों की ओर से हुई अग्रिम सैन्य गतिविधियों को धीरे-धीरे कम किया गया है, लेकिन सतर्कता पूरी तरह बरकरार है।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। हमारी आंखें और कान पूरी तरह खुले हैं और जो भी कार्रवाई आवश्यक होगी, उसके लिए हम पूरी तरह तैयार हैं।”

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