(बाएं से): राम माधव, एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड और कर्ट कैंपबेल / Shinjini Ghosh
23 अप्रैल को अमेरिका-भारत संबंधों पर हुई एक व्यापक चर्चा में पूर्व राजनयिकों, नीति निर्माताओं, राजनीतिक नेताओं और रणनीतिकारों ने 'आपसी विश्वास, संवेदनशीलता और सम्मान' के महत्व पर बल दिया।
हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न पैनलों ने भारत के आर्थिक दृष्टिकोण में हो रहे बदलावों, अमेरिका-भारत संबंधों के नए भविष्य के रास्तों और भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की वर्तमान भूमिका पर चर्चा की।
यह भी पढ़ें: पूर्व राजदूत जस्टर ने रेखांकित किया भारत-अमेरिका साझेदारी में लचीलापन
अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने कहा, 'यह कुछ हद तक चिंताजनक है कि हमें आपसी सम्मान की याद दिलाने की आवश्यकता है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि अमेरिका-भारत संबंध कभी इस स्थिति तक पहुंचेंगे, लेकिन मैं स्वीकार करता हूं कि हम यहां हैं, और मेरा मानना है कि एक मूलभूत सिद्धांत के रूप में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने भारत को 'नरक का गर्त' कहा था, राज्यसभा की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां दोनों देशों के संबंधों पर संदेह पैदा करती हैं।
चतुर्वेदी ने कहा, 'ये टिप्पणियां ट्रंप समर्थक की ओर से आई हैं और ट्रंप द्वारा इसे सोशल मीडिया पर साझा करने से हमारे मन में एक सवाल और संदेह पैदा होता है कि हम भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी के अनुरूप विकसित करने के लिए कितनी दूर तक जा पाएंगे।'
इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव ने भी इस बात पर प्रकाश डाला कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासी 'बहुत अधिक चिंता और परेशानियों' से गुजर रहे हैं। माधव ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका-भारत संबंधों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक 'विश्वास' की कमी है।
माधव ने कहा, 'आपसी संवेदनशीलता महत्वपूर्ण है,' और साथ ही यह भी कहा कि बेहतर भविष्य के लिए समकालीन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर हालिया तनाव का जिक्र करते हुए माधव ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इससे आर्थिक स्तंभ कमजोर हुआ है।
हालांकि, भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव जरूर आया है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत साझेदारियां भी मौजूद हैं।
जस्टर ने कहा, 'मुझे लगता है कि अमेरिका-भारत के मजबूत संबंध कायम रहेंगे, चाहे वह रक्षा क्षेत्र हो, समग्र व्यापार और निवेश, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाएं, प्रौद्योगिकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा।'
अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login