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सोमनाथ को मिटाने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन न मंदिर टूटा, न भारत झुका: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ की यात्रा केवल 1000 वर्षों की आस्था और आत्मगौरव की कहानी नहीं है, बल्कि यह 1951 में हुए आधुनिक पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी दर्शाती है।

पीएम मोदी / IANS/PMO

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सदियों तक सोमनाथ मंदिर और भारत को नष्ट करने के कई प्रयास किए, लेकिन वे कभी सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की गाथा को केवल विनाश की घटनाओं तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसे साहस, बलिदान, आत्मसम्मान और पुनर्निर्माण के संकल्प के प्रतीक के रूप में याद किया जाना चाहिए।

सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सद्भावना मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ की यात्रा केवल 1000 वर्षों की आस्था और आत्मगौरव की कहानी नहीं है, बल्कि यह 1951 में हुए आधुनिक पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी दर्शाती है।

“यह विनाश नहीं, भारत के अस्तित्व और गौरव का उत्सव है”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह पर्व केवल हजार साल पहले हुए विनाश को याद करने का अवसर नहीं है। यह 1000 वर्षों की निरंतर यात्रा का उत्सव है। यह भारत के अस्तित्व और गौरव का पर्व है।” उन्होंने कहा कि सोमनाथ और भारत का इतिहास एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। “जिस तरह सोमनाथ को तोड़ने की बार-बार कोशिशें की गईं, उसी तरह भारत को नष्ट करने के प्रयास होते रहे। लेकिन न सोमनाथ टूटा और न भारत। क्योंकि भारत और उसकी आस्था की आत्मा एक-दूसरे में समाई हुई है।”

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इतिहास के पन्नों से सोमनाथ की संघर्ष गाथा
प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर हमला किया और उसे नष्ट समझा, लेकिन कुछ वर्षों में ही मंदिर फिर खड़ा हो गया। 12वीं शताब्दी में राजा कुमारपाल ने मंदिर को भव्य स्वरूप दिया। 13वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी के हमले का जालौर के राणा कुंभा ने डटकर मुकाबला किया। 14वीं शताब्दी में जूनागढ़ के राजाओं ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। 15वीं शताब्दी में सुल्तान अहमद शाह और उसके पौत्र महमूद बेगड़ा ने मंदिर को अपवित्र करने का प्रयास किया, लेकिन शिवभक्तों ने उसे फिर से खड़ा किया। 17वीं–18वीं शताब्दी में औरंगज़ेब द्वारा किए गए प्रयासों के बाद महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने एक बार फिर सोमनाथ का पुनर्निर्माण कराया।

“सोमनाथ का इतिहास हार का नहीं, विजय का है”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय, पुनर्निर्माण, शौर्य, त्याग और निस्वार्थता का इतिहास है।” उन्होंने कहा कि हर युग में हमले हुए, लेकिन हर युग में सोमनाथ और भी अधिक दृढ़ होकर खड़ा हुआ। “लंबा संघर्ष, अडिग प्रतिरोध, अपार धैर्य और सृजनात्मक शक्ति ने सोमनाथ को जीवित रखा। ऐसी आस्था और संकल्प विश्व इतिहास में विरले उदाहरण हैं।”

‘सोमनाथ’ यानी अमरता
सोमनाथ नाम के अर्थ को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “सोमनाथ का अर्थ है ‘सोम’ — यानी अमरता। आक्रांताओं ने सोचा कि उनकी तलवारें सनातन को हरा देंगी, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोम यानी अमर।” उन्होंने कहा कि भगवान शिव का एक नाम ‘मृत्युंजय’ भी है — जो मृत्यु पर विजय पाने वाले हैं। “शिव हर कण में विद्यमान हैं। जब हम हर जीव में शिव को देखते हैं, तो हमारी आस्था को कोई कैसे डिगा सकता है?”

“आक्रांता इतिहास के पन्नों में सिमट गए”
प्रधानमंत्री ने कहा कि समय ने सिद्ध कर दिया है कि “जो धार्मिक उन्माद के साथ सोमनाथ को नष्ट करने आए, वे इतिहास के पन्नों में सिमट गए, लेकिन सोमनाथ आज भी समुद्र तट पर अडिग खड़ा है, धर्मध्वज को ऊंचा किए हुए।” 

भविष्य के लिए स्वाभिमान का संकल्प
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जैसे दुनिया के अन्य देश अपनी सदियों पुरानी विरासत पर गर्व करते हैं, वैसे ही भारत को भी अपने संस्कृति, अस्तित्व और पहचान को और सशक्त करना होगा।

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