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अमेरिका के भविष्य को सुरक्षित करने का नया रास्ता है हाइब्रिड पूंजीवादी अर्थव्यवस्था

यदि अमीर और गरीब के बीच की खाई इसी तरह बढ़ती रही, तो मध्यवर्गीय उपभोक्ता ही खत्म हो जाएंगे—और बिना उपभोक्ताओं के कोई भी अर्थव्यवस्था नहीं चल सकती।

अमेरिकी ध्वज / pexels

जब अमेरिका चीन, भारत, यूरोपीय संघ और उभरते ब्रिक्स समूह जैसी वैश्विक आर्थिक ताकतों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, तब यह स्पष्ट हो गया है कि देश को एक नए आर्थिक रोडमैप की आवश्यकता है। अमेरिका की बढ़त एक ऐसी हाइब्रिड पूंजीवादी व्यवस्था से आ सकती है, जो मुक्त बाजार की ऊर्जा को रणनीतिक सरकारी हस्तक्षेप से जोड़ती हो। यह मॉडल न केवल वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को मजबूत बनाएगा, बल्कि घरेलू स्तर पर आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

बढ़ती असमानता: सिर्फ सामाजिक नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा
आज अमेरिका जिस आर्थिक दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह टिकाऊ नहीं है। अत्यधिक आर्थिक असमानता और सामाजिक उपेक्षा केवल नैतिक संकट नहीं, बल्कि रणनीतिक कमजोरी बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक चेतावनी दे चुका है कि ज्यादा असमानता दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को कमजोर करती है।

यदि अमीर और गरीब के बीच की खाई इसी तरह बढ़ती रही, तो मध्यवर्गीय उपभोक्ता ही खत्म हो जाएंगे—और बिना उपभोक्ताओं के कोई भी अर्थव्यवस्था नहीं चल सकती। एक ऐसा तंत्र, जहां शीर्ष 1% के पास ही अधिकांश संपत्ति सिमटी हो, अंततः सामाजिक असंतोष, बाजार अस्थिरता और व्यवस्था के पतन की ओर ले जाता है। इसीलिए असमानता आज अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है।

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हाइब्रिड अर्थव्यवस्था के सात स्तंभ
अमेरिका को अपने कर ढांचे पर दोबारा विचार करना होगा। प्रस्ताव है कि आम नागरिकों के लिए संघीय आयकर और पेरोल टैक्स समाप्त कर, 5 मिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति रखने वालों पर वार्षिक संपत्ति कर लगाया जाए। इसका तर्क स्पष्ट है—काम पर टैक्स नहीं, संपत्ति पर टैक्स। संपत्ति असमानता, आय असमानता से कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि बड़ी पूंजी समय के साथ खुद को कई गुना बढ़ाती है। अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि यदि कुल संपत्ति पर मात्र 1.5–3% का कर लगाया जाए, तो यह मौजूदा आयकर व्यवस्था से ज्यादा राजस्व पैदा कर सकता है। यह कर एक तरह से “राष्ट्रीय सुरक्षा योगदान” होगा—क्योंकि सबसे ज्यादा लाभ भी देश की स्थिरता से इन्हीं वर्गों को होता है।

आवास संकट में कॉरपोरेट भागीदारी
हाइब्रिड मॉडल का दूसरा स्तंभ है—कॉरपोरेट पूंजी को आवासीय संकट के समाधान में लगाना। एपल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए एक संयुक्त कर्मचारी आवास कोष का प्रस्ताव है, जिससे उनके कर्मचारी घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट और मॉर्गेज सहायता प्राप्त कर सकें। यह योजना बाजार दरों पर आधारित होगी, ताकि कीमतें न बढ़ें और बैंकिंग सिस्टम भी सुरक्षित रहे। साथ ही स्थानीय सरकारों और बिल्डरों के साथ मिलकर नए घरों की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।

जीवन-यापन लागत से जुड़ी मजदूरी
आज अमेरिका का न्यूनतम वेतन 7.25 डॉलर प्रति घंटा है, जो किसी भी राज्य में सम्मानजनक जीवन के लिए अपर्याप्त है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, चार सदस्यीय परिवार को बुनियादी जरूरतों के लिए सालाना 97 हजार से 1.56 लाख डॉलर तक की जरूरत है। इसका मतलब है कि कई राज्यों में एक व्यक्ति को 25 से 40 डॉलर प्रति घंटा कमाना जरूरी है। हाइब्रिड मॉडल क्षेत्रीय जीवन-यापन लागत के अनुसार न्यूनतम वेतन तय करने की बात करता है, ताकि पूर्णकालिक काम करने वाला कोई भी व्यक्ति गरीब न रहे।

क्षेत्रीय वेतन नीति
एक देश, एक वेतन नीति अमेरिका जैसे विविध देश में कारगर नहीं हो सकती। इसलिए प्रस्ताव है कि राज्य और शहर स्तर पर जीवन-यापन सूचकांक के अनुसार वेतन तय हो, जो समय के साथ अपने आप समायोजित होता रहे।

अमेरिका की चार “राजधानियां” – अद्वितीय शक्ति
अमेरिका की वैश्विक ताकत चार स्तंभों पर टिकी है, जिनमें वॉल स्ट्रीट (वित्तीय शक्ति), सिलिकॉन वैली (नवाचार), हॉलीवुड (सांस्कृतिक प्रभाव) और वॉशिंगटन डीसी (शासन) शामिल हैं। हाइब्रिड मॉडल इन चारों को एक साझा राष्ट्रीय रणनीति में जोड़ने की बात करता है।

हाई-स्पीड रेल: रोजगार और आवास का सेतु
तेज रफ्तार रेल नेटवर्क से लोग सस्ते इलाकों में रहकर बड़े शहरों में काम कर सकेंगे। इससे आवासीय दबाव घटेगा, श्रम गतिशीलता बढ़ेगी और राष्ट्रीय उत्पादकता को बल मिलेगा।

कॉरपोरेट नेतृत्व से देशभक्ति की अपील
इस मॉडल की सफलता के लिए कॉरपोरेट जगत को केवल लाभ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी निभानी होगी। उचित वेतन, सामुदायिक निवेश और कर योगदान—यह सब उनके अपने हित में भी है।

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