रोमानिया की विदेश मंत्री के साथ जयशंकर। / X/@DrSJaishankar
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर साइप्रस में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक- जिम्निच में भाग लेने के लिए पहुंचे। गुरुवार को उन्होंने अपने फ्रांसीसी, स्पेनिश, पोलिश, रोमानियाई और डच समकक्षों से मुलाकात की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। कुछ तस्वीरें साझा की। इनमें स्पेनिश विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस से खास मुलाकात और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा का भी जिक्र था। उन्होंने कहा, स्पेन के विदेश मंत्री स्पेन के विदेश मंत्री के साथ साइप्रस में आयोजित जिम्निच बैठक के बीच मुलाकात सुखद रही।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर दोनों के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा और पीपल टू पीपल (पीटूपी) संबंधों को और मजबूत करने के अगले कदमों पर चर्चा हुई। साथ ही, मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
इसके साथ ही उन्होंने साइप्रस में कई यूरोपीय नेताओं से भी मुलाकात की। इनमें फ्रांसीसी विदेश मंत्री नोएल बैरोट, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, रोमानिया की विदेश मंत्री ओआना त्सोयू और नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेन्डसन शामिल रहे।
इन मुलाकातों को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
ये बैठक साइप्रस के लिमासोल में आयोजित हो रही है। दूसरी एक्स पोस्ट में ग्रुप फोटो से लेकर अलग-अलग देशों के समकक्षों संग मुलाकात की तस्वीरें हैं। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि इस बैठक में ईयू और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ भारत का रिश्ता लगातार विभिन्न क्षेत्रों व्यापार, तकनीक, रक्षा और पीपल टू पीपल संबंधों में और गहरा हो रहा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि बैठक के दौरान उभरते हुए बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में साझा हितों और व्यावहारिक सहयोग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई।
जिम्निच सम्मेलन ईयू के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की एक अनौपचारिक और उच्च स्तरीय बैठक होती है। यह हर छह महीने में यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता वाले देश की ओर से आयोजित की जाती है। इसका नाम जर्मनी के महल 'श्लॉस जिम्निच' के नाम पर पड़ा क्योंकि यहीं पर पहली बार 1974 में अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई थी।
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