अनिल मेनन / NASA
भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन आठ महीने के अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। वे रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरने के बाद सुरक्षित रूप से ISS पहुंचे, जहां वे वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी संबंधी प्रयोगों में हिस्सा लेंगे।
कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से प्रक्षेपण के बाद करीब तीन घंटे और दो ऑर्बिट की यात्रा पूरी कर सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान दोपहर 1:52 बजे (IDT) ISS के प्रिचल मॉड्यूल से जुड़ा। मेनन के साथ रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी ऑर्बिटल प्रयोगशाला पहुंचे।
इससे पहले तीनों अंतरिक्ष यात्री सुबह 10:47 बजे (IDT) यानी स्थानीय समयानुसार शाम 7:47 बजे बैकोनूर से रवाना हुए थे। उनके ISS पहुंचने के बाद अगले लगभग दो सप्ताह के लिए स्टेशन पर क्रू सदस्यों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
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लॉन्च से पहले, मेनन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया था- यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स की सेवा करने और नासा तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के समर्थन में आज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरने पर गर्व है!
उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा कि कजाकिस्तान से सोयुज एमएस-29 पर लॉन्च होने और नासा तथा एक्सपेडिशन 74/75 के समर्थन में आठ महीने के मिशन की शुरुआत करने को लेकर उत्साहित हूं। नासा कम्युनिटी, दोस्तों, परिवार और प्रियजनों का आभारी हूं और कल के लिए उत्साहित हू।
नासा के एस्ट्रोनॉट जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स; यूरोपियन स्पेस एजेंसी की एस्ट्रोनॉट सोफी एडेनोट; और रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट सर्गेई कुड-स्वेरचकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रे फेड्याएव ने नए लोगों का स्वागत किया।
इस मिशन को लेकर नासा की ओर से कहा गया कि मेनन, डुब्रोव और किकिना अप्रैल 2027 तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी में रहेंगे। यह मेनन की अंतरिक्ष की पहली यात्रा है और डुब्रोव तथा किकिना दोनों के लिए यह दूसरा मिशन है।
मिशन के दौरान मेनन वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन से जुड़े कई प्रयोग करेंगे, जिनका उद्देश्य मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ाना और पृथ्वी पर जीवन को लाभ पहुंचाना है। वे अंतरिक्ष में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के उत्पादन को बेहतर बनाने संबंधी शोध करेंगे, जिससे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और बेहतर मेडिकल डिवाइस के लिए जरूरी कंपोनेंट्स का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा सकती है।
मेनन ऑगमेंटेड रियलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तरीकों का इस्तेमाल करके अल्ट्रासाउंड भी करेंगे, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में पृथ्वी से मेडिकल सपोर्ट की जरूरत खत्म हो सकती है। नासा ने कहा कि मेनन उन स्टडीज में टेस्ट सब्जेक्ट के तौर पर भी काम करेंगे जिनमें यह देखा जाएगा कि अंतरिक्ष में ब्लड फ्लो कैसे बदलता है। साथ ही, वे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने और इलाज के नए तरीकों को विकसित करने के लिए माइक्रोग्रैविटी में बायोप्रिंटिंग वैस्कुलर कंस्ट्रक्ट्स का टेस्ट भी करेंगे।
नासा ने बताया कि ऑर्बिटल आउटपोस्ट पर अपना आठ महीने का साइंस मिशन पूरा करने के बाद विलियम्स, कुड-स्वेरचकोव और मिकाएव के जाने के बाद, 26 जुलाई को 'एक्सपीडिशन 75' शुरू होगा। 25 जुलाई को कमांड सौंपने का समारोह होगा, जिसमें स्टेशन की कमांड कुड-स्वेरचकोव से जेसिका मीर को सौंपी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से लगातार मानव उपस्थिति बनी हुई है। माइक्रोग्रैविटी के कारण यह वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक अनूठी प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है, जहां ऐसे कई प्रयोग संभव हैं जिन्हें पृथ्वी पर करना कठिन या असंभव है। यहां होने वाले अनुसंधान से चिकित्सा, इंजीनियरिंग, जीवविज्ञान और पदार्थ विज्ञान जैसे क्षेत्रों में प्रगति होती है तथा चंद्रमा और मंगल पर भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी में भी मदद मिलती है।
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