फाइल फोटो / IANS
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश में भड़की हालिया हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एजेंसियों के अनुसार, बांग्लादेश छात्र आंदोलन के शीर्ष नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के तुरंत बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल सक्रिय हो गए, जिन्होंने फर्जी प्रचार और भ्रामक सूचनाएं फैलाकर देश में हिंसा को हवा दी।
जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में ISI-समर्थित डिजिटल अकाउंट्स बांग्लादेश में सक्रिय थे, जो सुनियोजित तरीके से भारत-विरोधी भावनाएं भड़काने का काम कर रहे थे। एजेंसियों का कहना है कि ISI का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश को अस्थिरता और अराजकता की ओर धकेलना था, ठीक उसी पैटर्न पर जैसा पहले छात्र आंदोलन के दौरान देखा गया था, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी साजिश की योजना पहले से बनाई गई थी। ISI ने जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन इस्लामिक छात्र शिबिर (ICS) को सीधे आंदोलन का नेतृत्व न करने के निर्देश दिए थे। योजना के तहत ISI पाकिस्तान से संचालित अपने सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए प्रचार और फर्जी नैरेटिव फैलाएगी, जबकि जमात और उससे जुड़े संगठन इस प्रचार के आधार पर जमीनी स्तर पर हिंसा भड़काने का काम करेंगे।
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एजेंसियों का कहना है कि ISI नहीं चाहती थी कि संभावित फरवरी चुनावों की स्थिति में जमात को आंदोलन का चेहरा माना जाए। इसी कारण उसे पर्दे के पीछे रखा गया, जबकि हिंसा को नियंत्रित करने का काम उसके सहयोगी तत्वों के जरिए कराया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि ISI ने बांग्लादेश में मौजूद अपने नियंत्रण वाले कट्टरपंथी समूहों को सक्रिय कर दिया था। ये समूह हिंसा के दौरान सबसे आगे नजर आए, जबकि जमात और उसका छात्र संगठन पीछे रहकर पूरी गतिविधियों को दिशा दे रहे थे।
भारतीय एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे असंतोष और हिंसा में पाकिस्तान के डिजिटल नेटवर्क की भूमिका सबसे अहम रही। इस नेटवर्क में पाकिस्तान से फंड प्राप्त कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल थे, जिन्होंने भारत-विरोधी प्रोपेगैंडा लेख प्रकाशित किए। इन लेखों में भारत को शेख हसीना का संरक्षक बताने की कोशिश की गई।
गौरतलब है कि सत्ता से बेदखल होने के बाद शेख हसीना अगस्त में बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं, जहां उन्होंने शरण ली थी। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से बांग्लादेश को अपना रणनीतिक खेल का मैदान बनाने की कोशिश कर रहा है।
एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की हिंसा और भारत-विरोधी माहौल भारत की पूर्वी सीमा पर दबाव पैदा करता है। ISI की रणनीति का एक अहम हिस्सा बांग्लादेश में ऐसे लोगों को निशाना बनाना है, जो कट्टरपंथी सोच से सहमत नहीं हैं, ताकि वहां पाकिस्तान जैसी अस्थिर स्थिति पैदा की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बेहद खतरनाक खेल है। लंबे समय में, जो बांग्लादेश कभी एक उभरती अर्थव्यवस्था माना जाता था, वह पाकिस्तान जैसी स्थिति में फंस सकता है। साथ ही, यह भी आशंका जताई जा रही है कि ISI की कोशिश चुनावों को टालने या रद्द कराने की है। अगर ऐसा होता है, तो अगला कदम अलगाववादी ताकतों का ऐसा इकोसिस्टम खड़ा करना हो सकता है, जैसा कभी जम्मू-कश्मीर में देखा गया था।
एक अधिकारी ने कहा कि अगर यह साजिश सफल होती है, तो बांग्लादेश की स्थिति मौजूदा हालात से भी ज्यादा खराब हो सकती है। वहीं, कट्टरपंथी इस्लामी ताकतें अपने अंतिम लक्ष्य—इस्लामिक स्टेट की स्थापना—की ओर एक और कदम बढ़ा लेंगी।
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