भारत और अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज / File Photo: IANS
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर अब भी इच्छुक है और इस दिशा में बातचीत जारी है। मंत्रालय ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन न करने के कारण भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ठप हो गई।
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “मीडिया में आई टिप्पणियों में जिस तरह से इन चर्चाओं का वर्णन किया गया है, वह सही नहीं है।” उन्होंने कहा, “भारत दोनों देशों की पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में अब भी रुचि रखता है और इसे जल्द पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।”
रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2024 से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं। उन्होंने कहा, तब से दोनों पक्ष कई दौर की बातचीत कर चुके हैं और कई मौकों पर समझौते के काफी करीब भी पहुंचे हैं।
लटनिक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए MEA प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि “2025 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आठ बार फोन पर बातचीत हुई है, जिनमें भारत-अमेरिका के व्यापक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।”
गौरतलब है कि अमेरिकी वाणिज्य सचिव लटनिक ने गुरुवार को कहा था कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए आगे नहीं बढ़ पाया क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप को प्रधानमंत्री मोदी का फोन नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पीएम मोदी से राष्ट्रपति को कॉल करने के लिए कहा था, लेकिन भारत इस पर असहज था।
लटनिक ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस बीच इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते कर लिए, जबकि उन्हें उम्मीद थी कि भारत के साथ समझौता इन देशों से पहले पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा, “हमने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ समझौते कर लिए। हमें लगा था कि भारत पहले तैयार होगा, लेकिन जब अन्य देशों के साथ सौदे हो गए और दरें तय हो गईं, तब भारत ने दोबारा संपर्क किया। तब सवाल यह था कि अब भारत किस बात के लिए तैयार है?”
MEA ने एक बार फिर दोहराया कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता एक जटिल प्रक्रिया है और भारत किसी भी समझौते को राष्ट्रीय हितों और आपसी लाभ के आधार पर ही अंतिम रूप देगा।
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