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ट्रंप की टैरिफ चाल पर भारत की स्मार्ट डिप्लोमेसी, बढ़ाया दोस्ती का हाथ

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति देश को दीर्घकालिक लाभ दिला सकती है, विशेषकर उस समय जब वैश्विक व्यापार प्रणाली दबाव में है।

 ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का दुनियाभर में असर हो रहा है। ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का दुनियाभर में असर हो रहा है। / Reuters

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए व्यापक आयात शुल्कों के बीच भारत ने संतुलित और रणनीतिक रुख अपनाया है। जहां कई देश अमेरिका के खिलाफ प्रतिशोधी शुल्क लगाने की तैयारी में हैं, वहीं भारत ने फिलहाल किसी भी प्रतिशोधात्मक कदम से परहेज करते हुए वार्ता का रास्ता चुना है।

भारत की रणनीति: व्यापार वार्ता और शुल्कों में कटौती
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार अमेरिका के साथ एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Deal) की दिशा में सक्रियता से काम कर रही है। इस प्रस्तावित समझौते के तहत भारत ने संकेत दिया है कि वह अमेरिका से आने वाले 50% से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने को तैयार है।

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ से भी बातचीत जारी
भारत ने न केवल अमेरिका के साथ, बल्कि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं, ताकि वैश्विक व्यापार में अस्थिरता का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े।

यह भी पढ़ें- टैरिफ वॉर : अनुमानित विकास लक्ष्य हासिल कर सकता है भारत, अधिकारियों ने बताया आधार

सरकार की मंशा: स्थिरता और निवेश का माहौल बनाए रखना
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि व्यापार युद्ध में कूदने की बजाय एक ऐसा माहौल तैयार करें जहां भारत को निवेश के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में देखा जाए।"

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति देश को दीर्घकालिक लाभ दिला सकती है, विशेषकर उस समय जब वैश्विक व्यापार प्रणाली दबाव में है।

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