सांकेतिक चित्र... / REUTERS/Benoit Tessier/File Photo
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने संकेत दिया है कि वह भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ा सकता है। इसकी वजह यह है कि हाल की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर गति से बढ़ी है। इससे एक बार फिर साफ होता है कि वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका बहुत अहम है।
भारत की 2025 की आर्थिक वृद्धि को लेकर पूछे गए सवाल पर आईएमएफ की संचार विभाग की निदेशक जूली कोज़ैक ने कहा कि भारत ग्लोबल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है, भले ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल में अनिश्चितता छाई हुई हो। कोज़ैक ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा, "हमने भारत में देखा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है।"
आईएमएफ की हाल की समीक्षा में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत आंकी गई थी। यह अनुमान देश के भीतर मजबूत खपत पर आधारित है। जूली कोज़ैक ने बताया कि बाद में आए नए आर्थिक आंकड़ों, खासकर तीसरी तिमाही के आंकड़ों ने आईएमएफ का भरोसा और मजबूत किया है। तीसरी तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि अनुमान से ज्यादा रही। इसी वजह से आईएमएफ को अब यह संभावना दिख रही है कि आने वाले समय में भारत की विकास दर के अनुमान को और ऊपर किया जा सकता है।
आईएमएफ अगले कुछ दिनों में अपने वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक का जनवरी अपडेट जारी करने जा रहा है। इसमें भारत और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नए अनुमान शामिल होंगे। उस समय भारत के लिए संशोधित विकास दर भी बताई जाएगी।
कोज़ैक ने कहा, "हमारा जनवरी रिपोर्ट अपडेट अगले कुछ दिनों में आने वाली है। इसलिए उस समय हमारे पास भारत के लिए संशोधित ग्रोथ का आंकड़ा होगा।" हालांकि उन्होंने अपडेट से पहले संशोधित आंकड़ा नहीं बताया, लेकिन कोज़ैक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के बारे में फंड का आकलन पूरी तरह से सकारात्मक बना हुआ है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि भारत के बारे में हमारे लिए निचोड़ यह है कि यह ग्लोबल ग्रोथ का एक प्रमुख चालक रहा है। भारत में ग्रोथ काफी मजबूत रही है।"
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा समय में आईएमएफ का यह संकेत खास मायने रखता है। ओआरएफ अमेरिका के सीनियर फेलो अनित मुखर्जी ने कहा कि फंड की टिप्पणियां ऐसे समय में भारत की मजबूती को दिखाती हैं जब कई अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता से जूझ रही हैं।
मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और ग्लोबल ग्रोथ के लिए बहुत अच्छी खबर है क्योंकि भारत अभी ग्लोबल ग्रोथ में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है।" उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय माहौल कठिन बना हुआ है। शुल्क को लेकर अनिश्चितता है, नीतियों में बदलाव का डर है और केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ये सभी बातें मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा कर रही हैं।
इन सबके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। अनित मुखर्जी ने कहा, "अप्रैल और फिर जून में टैरिफ के झटके के बावजूद, अर्थव्यवस्था ने न सिर्फ टिके रहने की क्षमता दिखाई है, बल्कि उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन भी किया है। यही वजह है कि आईएमएफ अब अपने अनुमान को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।"
उन्होंने कहा, "कभी-कभी ऐसा होता है, लेकिन यह दुर्लभ है और यह आश्चर्यजनक है क्योंकि ग्लोबल अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में सभी जानते हैं। इसलिए यह बहुत आश्चर्यजनक है और भारतीय नजरिए से यह सुखद आश्चर्य है।"
उन्होंने भारत के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय घरेलू कारकों, खासकर खपत को दिया। मुखर्जी ने कहा, "इस ग्रोथ के मुख्य कारणों में से एक घरेलू खपत है।"
इसे त्योहारी सीजन से पहले उठाए गए पॉलिसी कदमों से जोड़ते हुए उन्होंने आगे कहा, "यह छुट्टियों के मौसम से ठीक पहले जीएसटी में कमी के कारण हुआ है। इसलिए आप देखते हैं कि तीसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण रूप से ऊपर आ रहे हैं।"
इसके अलावा, भारत में महंगाई नियंत्रण में है और सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए हुए है। सरकार ने बिना सोचे-समझे बड़े खर्च करने से बचते हुए वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता दी है। इसी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के कठिन माहौल में भी मजबूती से आगे बढ़ रही है।
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