सांकेतिक चित्र... / Tapasya Chaubey
अमेरिका में फ्लू बेहद जानलेवा बीमारी है। यह आम तौर पर मौसम परिवर्तन के साथ आता है। यानी अक्टूबर से मार्च-मई तक। इसके लक्षण तेज बुखार, खांसी-ज़ुकाम, गले और बदन में असहनीय दर्द के साथ बच्चों में उल्टी-पेट खराब तक हो सकते हैं।
फ्लू के साथ ही मार्च अपने साथ पोलन एलर्जी भी लेकर आता है। एक और जहां रंग-बिरंगे फूलों से धरती सज रही होती है, वहीं दूसरी ओर पोलन यानी परागकणों के कारण कई लोगों में भयंकर एलर्जी हो जाती है। जहां एक ओर ये पेड़-पौधों के फूलों और फलों की संख्या में वृद्धि कर रहे होते है।
वहीं दूसरी हवा में तैर रहे ये पोलन इतने सूक्ष्म होते हैं कि आसानी से सांसों के साथ सीधे फेफड़ों में चले जाते हैं। नतीजन शरीर में तुरंत एलर्जिक रिएक्शन शुरू हो जाता है। इसके लक्षण फ्लू से थोड़ा अलग होते है। इसमें बुख़ार के साथ सर्दी-ज़ुकाम और बॉडी में खुजली जैसे लक्षण दिखते हैं।
इससे हुए बुखार को 'हे फीवर' कहा जाता है। वहीं, जिन्हें पहले से अस्थमा की समस्या होती है पोलन एलर्जी उनके लिए खतरनाक है। इसके बचाव का बस यही तरीका है कि बाहर निकलते वक्त मास्क पहनें, विटामिन सी लें और तरल पदार्थ का सेवन अधिकाधिक सेवन करें।
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फ्लू से अमेरिका में हर साल हजारों जानें जाती हैं। यह एक तेजी से फैलने वाला श्वसन संक्रमण है, जो इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होता है। यह खांसी या छींक के जरिए आसानी से फैलता है और ज्यादातार यह स्कूल के बच्चों द्वारा आसानी से फैलता है।
आमतौर पर लोग बिना किसी विशेष इलाज और टैनेनॉल/ आई बी ब्रूफेन के खाने से ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह बहुत पीड़ादायक है। इसे ठीक होने में आठ से दस दिन लग जाते हैं। शरीर कमजोरी से करीब 15-20 दिनों तक भरा रहा है। यह पहले से श्वास संबधित बीमारी या निमोनिया होने पर ज्यादा खतरनाक हो जाता है और आपको अर्जेंट केयर में जाना पड सकता है।
इसके बचाव का उपाय हेल्दी डाइट के साथ, हाथ-पैर धोते रहना, संक्रमित व्यक्ति के साथ सावधानी के साथ मिलना और टीकाकरण करवाना है। वैसे टीकाकरण से सिर्फ बचाव है यह फूलप्रूफ नहीं। टीकाकरण के बाद भी आप फ्लू की चपेट में आ सकते हैं। बस अंतर यह होगा की इसका प्रभाव कम दिखेगा।
कुल मिला कर कहा जाए तो दिसंबर से मई तक जहां अमेरिकी धरती चमक-धमक और फूलों से सज संवर रही होती है। आम इंसान इन वायरसों से त्रस्त रहता है।
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