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UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में 'दीपावली', भारत ने कहा 'खुशी का पल'

UNESCO ने X पर घोषणा की कि BREAKING. नई प्रविष्टि दीपावली, इंडिया। बधाई!

दीयों का हवाई दृश्य / Image-X/@narendramodi

UNESCO की इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज की प्रतिनिधि सूची में दीपावली को शामिल किया गया है। भारत ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे खुशी का क्षण बताया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने X पर लिखा कि यह खुशी का पल है कि बुराई पर अच्छाई की जीत और भगवान राम के अयोध्या लौटने का प्रतीक दीपावली जिसे दुनिया भर में मनाया जाता है, अब UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हो गई है।

दिन में पहले UNESCO ने X पर घोषणा की कि BREAKING. नई प्रविष्टि दीपावली, इंडिया। बधाई!

UNESCO की इस सप्ताह चल रही बैठक में करीब 80 देशों से 67 नामांकन पर विचार किया गया जिनमें भारत का दीपावली पर्व भी शामिल था। यह बैठक 8 दिसंबर से 13 दिसंबर तक दिल्ली के लाल किले पर हो रही है।

यह पहली बार है कि भारत UNESCO की इस समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। लाल किला मुख्य स्थल के रूप में सजाया गया है जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, दीया-प्रज्वलन और दीपावली से जुड़े पारंपरिक कला प्रदर्शनों को देखेंगे।

दिल्ली सरकार को निर्देश दिया गया है कि शहर को दीपावली के उत्सवी रंग में सजाया जाए, महत्वपूर्ण इमारतों को रोशन किया जाए, सार्वजनिक स्थानों पर दीये लगाए जाएं और अलग-अलग जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उद्देश्य यह है कि राष्ट्रीय राजधानी दीपावली की चमक से जगमगाती दिखाई दे।

मिली जानकारी के अनुसार दीपावली के साथ ही सूर्य देव की आराधना का पर्व छठ पूजा को भी UNESCO सूची के लिए नामित किया गया है। संस्कृति मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की समीक्षा के लिए संगीत नाटक अकादमी को लिखा है।

भारत के पास अभी UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में 15 तत्व शामिल हैं जैसे कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा, योग, वैदिक उच्चारण, रामलीला, रम्माण और कुटियाट्टम। दीपावली के शामिल होने से भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर और मजबूती मिली है।

UNESCO यह सूची विश्व की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं और जीवंत प्रथाओं की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार करता है। इसमें कला, कौशल, ज्ञान, अनुष्ठान, अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक स्थल और उन परंपराओं से जुड़े वस्तुओं को शामिल किया जाता है जिन्हें समुदाय अपनी विरासत मानते हैं।

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